पोक्सो एक्ट में अदालत ने दो आरोपियों को सुनाई सजा
एक को पंद्रह वर्षों और दूसरे को सात वर्षों की सुनाई गई सजा
नाबालिग लड़की का अपहरण कर दुष्कर्म का लगा था आरोप
किशनगंज/प्रतिनिधि
अनन्य विशेष न्यायाधीश पोक्सो अधिनियम दीपचंद पांडेय की अदालत ने नाबालिग का अपहरण कर दुष्कर्म के एक मामले में शुक्रवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने दो आरोपियों को अलग अलग सजा सुनाई है।एक आरोपी को पंद्रह वर्षों और दूसरे आरोपी को सात वर्षों की सजा सुनाई है।आरोपी मोहम्मद रज्जाक को पंद्रह वर्षों के सश्रम कारावास और 1 लाख 16 हजार रुपए अर्थदंड और आरोपी छोटू मोदक को सात वर्षों के सश्रम कारावास की सजा और 15 हजार रुपए अर्थदण्ड की सजा सुनाई है।यह सजा शुक्रवार को सुनाई गई है।
अर्थदण्ड की राशि नहीं देने पर आरोपी को अतिरिक्त सजा काटनी होगी।पोक्सो अधिनियम के विशेष लोक अभियोजक मनीष कुमार साह ने अदालत में सजा की बिंदु पर जोरदार जिरह पेश की। उपलब्ध साक्ष्यों व विशेष लोक अभियोजक की जिरह के बाद अदालत ने अपना फ़ैसला सुनाया। विशेष वाद संख्या 24/2020, पहाड़कट्टा थाना कांड संख्या 25/2019 में दोनों आरोपियों को सजा सुनाई गई।
आरोपी मोहम्मद रज्जाक पर नाबालिग का अपहरण कर दुष्कर्म करने और आरोपी छोटू मोदक पर आरोपी मोहम्मद रज्जाक को सहयोग करने का भी आरोप था।
वहीं अदालत ने पीड़िता को बतौर मुआवजा सरकार की ओर से पांच लाख रुपए व अर्थदंड की राशि में कुल 1 लाख 31 हजार रुपए भी पीड़िता को देने का आदेश पारित किया है।विशेष लोक अभियोजक मनीष कुमार साह ने अदालत में साक्ष्यों को मजबूती से पेश करते हुए सजा की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
पोक्सो अधिनियम के तहत ऐसे मामलों में त्वरित न्याय और पीड़ितों को उचित मुआवजा सुनिश्चित करने का प्रावधान है। इस फैसले से समाज में यह संदेश जाएगा कि नाबालिगों के साथ अपराध करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।


























