संवाददाता: विजय कुमार साह
टेढ़ागाछ प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत डाकपोखर पंचायत स्थित ऐतिहासिक बेणुगढ़ में बैसाखी पर्व के अवसर पर 15 अप्रैल (बुधवार) को एक दिवसीय भव्य मेले का आयोजन किया जा रहा है। यह मेला बाबा बेणु महाराज स्थल पर लगेगा, जो अपनी आस्था, इतिहास और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। हर वर्ष की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं के यहां पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
मान्यता है कि बेणुगढ़ का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। यहां स्थित बाबा बेणु महाराज के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। लगभग 180 एकड़ में फैले इस गढ़ परिसर में एक प्राचीन तालाब भी मौजूद है, जिसके बारे में स्थानीय लोगों में विशेष आस्था है। पूर्व प्रोफेसर मुक्ति प्रसाद दास के अनुसार, पूर्वजों के समय में लोग इस तालाब के किनारे पान-सुपारी चढ़ाकर पूजा करते थे और विवाह जैसे शुभ कार्यों के लिए बर्तन एवं अन्य आवश्यक सामग्री की मांग करते थे, जो कुछ समय बाद उन्हें प्राप्त हो जाती थी।
मेले को लेकर मंदिर कमेटी द्वारा व्यापक तैयारियां की गई हैं। पूरे मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव हो सके। सुरक्षा के दृष्टिकोण से मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की असामाजिक गतिविधि पर नजर रखी जा सके। समिति के सदस्यों ने स्पष्ट किया है कि उपद्रव करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की भी समुचित व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, मेले के सफल संचालन के लिए मंदिर कमेटी के स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है, जो श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करेंगे। प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। मेले के दौरान मजिस्ट्रेट, पुलिस बल और अन्य सुरक्षा कर्मियों की तैनाती रहेगी, ताकि आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
मंदिर परिसर के आसपास विभिन्न क्षेत्रों से आए दुकानदार अपनी-अपनी दुकानों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। मेले में खान-पान, खिलौने, पूजा सामग्री और अन्य सामानों की कई दुकानें सजेंगी, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र होंगी।
बाबा बेणु महाराज का यह मंदिर गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक माना जाता है, जहां सभी धर्मों के लोग आकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं और मुरादें मांगते हैं। यही कारण है कि यह मेला केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का भी अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है।





























