किशनगंज/पोठिया/राज कुमार
डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय, रायपुर अर्राबाड़ी में 7 जनवरी से आयोजित 15 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कोर्स का बुधवार को सफलतापूर्वक समापन किया गया। इस कोर्स का उद्देश्य उर्वरक डीलरों की पेशेवर क्षमताओं को बढ़ाना और उन्हें मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन में पैराएक्सटेंशन विशेषज्ञ के रूप में तैयार करना था।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. के. सत्यनारायण, सह-अधिष्ठाता एवं प्राचार्य, ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि में उर्वरक का महत्व अत्यधिक है और यह प्रशिक्षण डीलरों को अधिक प्रभावी और जिम्मेदार बनाने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करते हैं।
कोर्स के दौरान प्रशिक्षार्थियों ने मृदा प्रबंधन और उर्वरक के सही उपयोग से संबंधित अपने अनुभव साझा किए। एक प्रशिक्षार्थी ने कहा कि अब उन्हें अपने गांव के किसानों को सही दिशा दिखाने में मदद मिलेगी।
कोर्स के निदेशक डॉ. एस. के. पॉल ने प्रशिक्षार्थियों को प्रशिक्षण के लाभों के बारे में विस्तार से बताया और उन्हें कृषि क्षेत्र में उत्कृष्टता की ओर अग्रसर होने के लिए प्रेरित किया। समापन अवसर पर डॉ. संजय सहाय, नोडल अधिकारी (ACS), डॉ. एस. के. दत्ता और डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय, किशनगंज के अन्य वैज्ञानिक डॉ. हिना प्रवीन, डॉ. मोहसिना अंजुम, मनीष कुमार, डॉ. वंदना, डॉ. रीना रॉय और डॉ. बिनोद कुमार सहित अन्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मंच संचालन डॉ. श्वेता कुमारी ने किया।
यह प्रशिक्षण कोर्स विशेष रूप से फर्टिलाइजर डीलरों, कृषि व्यवसाय से जुड़े लोगों और कृषि क्षेत्र में कार्यरत अन्य व्यक्तियों के लिए आयोजित किया गया था। इसमें भाग लेने के लिए इच्छुक उम्मीदवार आधार कार्ड, 10वीं का प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र की फोटोकॉपी और दो पासपोर्ट साइज फोटो के साथ महाविद्यालय में आवेदन कर सकते थे।



























