विशेषज्ञों ने मिथकों के विरुद्ध जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया
कार्यशाला में किशनगंज से दर्जनों पत्रकार हुए शामिल
महिलाओं के स्वास्थ्य की सबसे बड़ी अनदेखी पीड़ा—सर्वाइकल कैंसर के विरुद्ध जागरूकता की जरूरत
संवाददाता/किशनगंज
देश में महिलाओं के बीच गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, जो पूरी तरह रोके जाने योग्य होने के बावजूद जागरूकता की कमी और सामाजिक मिथकों के कारण हजारों जीवन को प्रभावित कर रही है। समाज में फैली भ्रांतियों को खत्म करने और वैज्ञानिक जानकारी को जन-जन तक पहुँचाने में मीडिया की भूमिका आज पहले से अधिक महत्त्वपूर्ण है।
इसी उद्देश्य से आज पूर्णिया में एक महत्वपूर्ण मीडिया उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई ।कार्यशाला में किशनगंज,पूर्णिया, कटिहार,अररिया के पत्रकार शामिल हुए और अपने विचारों को साझा किया।किशनगंज से प्रेस क्लब के सचिव राजेश दुबे और अध्यक्ष सुखसागर नाथ सिन्हा की अगुआई में एक दर्जन से अधिक पत्रकारों ने इस कार्यशाला में हिस्सा लिया ।कार्यशाला में महिलाओं के स्वास्थ्य-सुरक्षा को नई दिशा देने का संदेश दिया गया।कार्यक्रम में प्रमंडल के सभी जिलों के सिविल सर्जन, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी,डीपीएम, यूनिसेफ के पदाधिकारी एवं प्रमंडल के सभी जिलों के मीडिया कर्मी ने भाग लिया है ।
सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से एचपीवी और सर्वाइकल कैंसर
मुख्य तकनीकी सत्र में डॉ. अंशुमन, स्वास्थ्य अधिकारी, यूनिसेफ बिहार ने गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की गंभीरता और भारत में इसके प्रसार पर वैज्ञानिक प्रस्तुति दी।उन्होंने कहा कि भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं की मृत्यु का प्रमुख कारण है। एचपीवी टीका सुरक्षित, प्रभावी और आवश्यक है। समय पर टीकाकरण और जागरूकता से इस रोग के खतरे को लगभग समाप्त किया जा सकता है।उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि वे तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग जनता तक पहुँचाएँ।
मीडिया रिपोर्टिंग टूलकिट, सीएएस और एचपीवी रिपोर्टिंग दिशा-निर्देश पर प्रशिक्षण
सत्र में मीडिया रिपोर्टिंग टूलकिट के 12 महत्वपूर्ण बिंदुओं, क्रिटिकल एप्रीज़ल स्किल्स और एचपीवी टीकाकरण से संबंधित रिपोर्टिंग दिशा-निर्देशों की विस्तृत जानकारी दी गई। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी किशनगंज डॉ देवेंद्र कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी खबरें लिखते समय वैज्ञानिक तथ्यों की सटीकता सर्वोपरि है। अपूर्ण या असत्यापित जानकारी जन-स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा सकती है।”
एचपीवी टीका पूरी तरह सुरक्षित—मीडिया मिथक तोड़ने में मदद करे
कार्यक्रम के अगले हिस्से में श्री शादाब मलिक, स्टेट सीएपी कंसल्टेंट, यूनिसेफ बिहार, ने मीडिया को तथ्य-जांच, मिथक-निर्धारण और जिम्मेदार स्वास्थ्य रिपोर्टिंग के वास्तविक तकनीकी पहलुओं पर प्रशिक्षित किया।उन्होंने कहा कि समाज में एचपीवी टीके के बारे में जो भी भ्रांतियाँ फैली हैं, वे वैज्ञानिक जानकारी की कमी का परिणाम हैं। मीडिया इन मिथकों को तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।”
व्यावहारिक अभ्यास समूह कार्य एवं प्रस्तुति
दोपहर के बाद प्रतिभागियों को समूहों में विभाजित कर उनसे एचपीवी और सर्वाइकल कैंसर पर नमूना जागरूकता रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया। प्रत्येक समूह ने तथ्य, वैज्ञानिक आधार और सामाजिक प्रभाव को शामिल करते हुए अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
“जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव”
समापन सत्र में मोहम्मद कैशर इक़बाल, क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक, यूनिसेफ, ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापन किया।उन्होंने कहा आज की कार्यशाला केवल ज्ञान-विनिमय का कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए एक सामूहिक प्रतिबद्धता है। मीडिया इस बदलाव की सबसे प्रभावी शक्ति है।समापन के बाद सामूहिक फोटो लिया गया और हाई-टी के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।



























