टेढ़ागाछ/किशनगंज/प्रतिनिधि
पोषण अभियान के लक्ष्य प्राप्ति हेतु टेढ़ागाछ परियोजना के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर शनिवार को अन्नप्राशन दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर छह माह के बच्चों को पूरक पोषाहार दिया गया एवं बेहतर पोषण के लिए जरुरी पूरक पोषाहार के विषय में जानकारी भी दी गयी। प्रखंड के क्रियाशील 173 आंगनबाड़ी केंद्रों पर अन्नप्राशन दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रभारी सीडीपीओ निशा कुमारी ने बतलाया कि आंगनबाड़ी केंद्र पर सेविका द्वारा पोषक क्षेत्र के 06 माह के शिशुओं को खीर व हलवा खिलाकर अन्नप्राशन दिवस की शुरुआत की गई तथा धात्री महिलाओं को भी पूरक पोषाहार के विषय में एवं साफ सफाई के बारे में जानकारी दी गयी।
जिससे माता एवं शिशु के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में कार्य की जाती है। ज्ञात को कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट पोषण अभियान के तहत ग्रामीण समाज के सभी लोगों तक इसकी पहुँच सुनिश्चित कराने हेतु नियमित रूप से आंगनबाड़ी सेविका कार्य कर रही हैं। साथ ही समाज के जनप्रतिनिधियों के साथ आपसी तालमेल व सहभागिता से इसकी लक्ष्य की प्राप्ति की जा सकती हैं।
सीडीपीओ निशा कुमारी ने इस अवसर पर विशेष रूप से अनुपूरक आहार के महत्व पर प्रकाश डाला एवं शिशु की साफ-सफाई की जरुरत पर जोर दिया। उन्होंने बताया की अनुपूरक आहार शिशु के आने वाले जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। 6 माह से 23 माह तक के बच्चों के लिए यह अति आवश्यक है।
छह माह तक शिशु का वजन लगभग दो गुना बढ़ जाता है एवं एक वर्ष पूरा होने तक वजन लगभग तीन गुना एवं लंबाई जन्म से लगभग डेढ़ गुना बढ़ जाती है। जीवन के दो वर्षों में तंत्रिका प्रणाली एवं मस्तिष्क विकास के साथ सभी अंगों में संरचनात्मक एवं कार्यात्मक दृष्टिकोण से बहुत तेजी से विकास होता है। इसके लिए अतिरिक्त पोषक आहार की जरूरत होती है। इसलिए 6 माह के बाद शिशुओं के लिए स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार देना चाहिए।
ऐसे दें बच्चों को पूरक आहार 6 माह से 8 माह के बच्चों के लिए नरम दाल, दलिया, दाल -चावल, दाल में रोटी मसलकर अर्ध ठोस (चम्मच से गिराने पर सरके, बहे नहीं) , खूब मसले साग एवं फल प्रतिदिन दो बार 2 से 3 भरे हुए चम्मच से देना चाहिए। ऐसे ही 9 माह से 11 माह तक के बच्चों को प्रतिदिन 3 से 4 बार एवं 12 माह से 2 वर्ष की अवधि में घर पर पका पूरा खाना एवं धुले एवं कटे फल को प्रतिदिन भोजन एवं नाश्ते में देना चाहिए। समेकित बाल विकास योजना के अंतर्गत 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों के बेहतर पोषण के लिए पोषाहार वितरित किया जाता है।
पूरक पोषाहार के विषय में सामुदायिक जागरूकता के अभाव में बच्चे कुपोषण का शिकार होते हैं। इससे बच्चे की शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास भी अवरुद्ध होता है एवं अति कुपोषित होने से शिशु मृत्यु दर में भी बढ़ोतरी होती है। वही प्रखंड स्तर पर विभिन्न पंचायतों के आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्रखंड समन्वयक रोहन कुमार मंडल, महिला पर्यवेक्षिका इंदु कुमारी, अनिता कुमारी मंडल, रंजु देवी ने पर्यवेक्षण करते हुए अन्नप्राशन दिवस का सफल आयोजन करवाया।