विद्यालय की जमीन का फर्जी जमाबंदी बना लेने का लगाया आरोप,प्रशासनिक व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवाल

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जिला प्रशासन से जांच कर फर्जी जमाबंदी रद्द करने तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग

कदवा/कटिहार–कदवा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत धनगामा पंचायत अवस्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय सह उच्च विद्यालय की भूमि का विवाद बढता हीं जा रहा है। बताया जाता है कि उक्त विद्यालय को दान मे मिली भूमि को किसी ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर अपने नाम करा लिया है।

अगर वास्तव में ऐसा हुआ है। तो प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठना लाजिमी है। मामले को लेकर धनगामा निवासी कामरु शर्मा ने जिला प्रशासन को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि खाता संख्या-142, खेसरा संख्या- 423, रकवा-98 की जमीन उनके दादा स्व. नुनाई शर्मा ने गांव में बच्चों की शिक्षा के लिए विद्यालय स्थापना हेतु दान दिया था।लेकिन भू-माफियाओं ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर उक्त जमीन का ऑनलाइन जमाबंदी अपने नाम कर लिया है। इतना ही नहीं उक्त जमीन की खरीद-बिक्री भी कर ली गयी है।

अगर आवेदक का आरोप सही है तो यह सिर्फ विद्यालय के जमीन की हेराफेरी और अनैतिक कब्जा का मामला नहीं होकर बल्कि राजस्व विभाग,अंचल कार्यालय और शिक्षा विभाग की कार्य शैली पर भी गंभीर सवाल है। ऐसे में सवाल यह भी है कि अगर जमीन विद्यालय के उपयोग में थी, तो अंचल कार्यालय ने बिना भौतिक सत्यापन के नामांतरण को कैसे स्वीकृति दे दी?

अगर सरकारी विद्यालय की भूमि थी, तो शिक्षा विभाग उसकी सुरक्षा एवं अभिलेखों के सुरक्षा के प्रति लापरवाह क्यों रहा। क्या विभागीय अधिकारियों की लापरवाही एवं राजस्व विभाग के अधिकारी एवं कर्मियों के भ्रष्टाचार में संलिप्त होने का लाभ लेकर भू-माफिया सरकारी संपत्ति पर कब्जा करने में सफल रहे हैं?

वहीं मामले में सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठने लगा है ।मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने जिला पदाधिकारी से उच्चस्तरीय जांच कराकर फर्जी जमाबंदी को रद्द करने तथा दोषियों पर कठोर कारवाई करने की मांग की है।क्योंकि समय रहते यदि निष्पक्ष जांच और कारवाई नहीं हुई,तो भविष्य में इस तरह के मामलों में वृद्धि से इंकार नहीं किया जा सकता है।

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