4 हजार रुपये रिश्वत मामले में तत्कालीन अंचलाधिकारी दोषी करार, चार वर्ष तक की सजा

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पटना: बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई में एक और बड़ी सफलता मिली है। निगरानी थाना कांड संख्या-75/2014 में विशेष न्यायालय, निगरानी, पटना ने तत्कालीन अंचलाधिकारी भोला पासवान (रोह अंचल, नवादा) को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।


निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, शिकायतकर्ता राकेश कुमार ने तत्कालीन अंचलाधिकारी भोला पासवान पर भूमि विवाद के निपटारे के एवज में 4,000 रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। शिकायत की सत्यापन के बाद निगरानी की टीम ने 15 अक्टूबर 2014 को आरोपी को 4,000 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।


मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 11 गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। अनुसंधानकर्ता पुलिस निरीक्षक विरेंद्र नारायण सिंह ने समय पर आरोप-पत्र दाखिल किया, जबकि विशेष लोक अभियोजक रितेश कुमार ने प्रभावी पैरवी कर आरोपी के विरुद्ध आरोप सिद्ध कराया।


विशेष न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह ने आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 के तहत तीन वर्ष के सश्रम कारावास एवं 5,000 रुपये जुर्माना, जबकि धारा-13(2) सहपठित धारा-13(1)(डी) के तहत चार वर्ष के सश्रम कारावास एवं 5,000 रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जुर्माना नहीं देने पर अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।


निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक भ्रष्टाचार के 11 मामलों में न्यायालय द्वारा दोषियों को सजा सुनाई जा चुकी है। ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध अभियान जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है और आम लोगों से रिश्वतखोरी की शिकायत हेल्पलाइन के माध्यम से दर्ज कराने की अपील की है।

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