आंधी ने उजाड़े किसानों के सपने, मक्का के बाद अब केले की फसल तबाह,किसानों की आंखों में बेबसी

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कोढा /कटिहार- बीती रात आए तेज आंधी और चक्रवाती तूफान ने किसानों की मेहनत पर ऐसा कहर बरपाया कि खेतों में हरियाली की जगह अब मायूसी पसरी हुई है। पहले मक्का की फसल बर्बाद हुई और अब केले के खेत भी धराशायी हो गए। लगातार पड़ रही प्राकृतिक मार ने किसानों की कमर तोड़ दी है।


सुबह जब किसान अपने खेतों की ओर पहुंचे, तो वहां का दृश्य देखकर कई की आंखें नम हो गईं। हवा इतनी तेज थी कि केले के मजबूत पेड़ भी जमीन पर बिछ गए। जिन खेतों में कुछ दिन पहले तक लहलहाती फसल किसानों को उम्मीद दे रही थी, वहां अब टूटे तनों और बिखरे पत्तों का मंजर दिखाई दे रहा है।

किसान संतोष मेहता ने दर्द भरे शब्दों में कहा—पहले मक्का की फसल खराब हुई थी, अब केला भी पूरी तरह गिर गया। करीब 2 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। महीनों की मेहनत कुछ ही मिनटों में खत्म हो गई। अब सरकार से मदद की उम्मीद है।”क्षेत्र के कई किसानों अरुण ,मनोज, जगदीश,शंभु का कहना है कि मौसम का बदलता मिजाज खेती को लगातार जोखिम भरा बना रहा है।

कभी बेमौसम बारिश, कभी आंधी-तूफान और कभी ओलावृष्टि—हर बार किसान ही सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। खेती में लागत बढ़ती जा रही है, लेकिन प्राकृतिक आपदाएं उनकी मेहनत और उम्मीद दोनों छीन ले रही हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द सर्वे कराने और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। किसानों का कहना है कि अगर समय रहते सहायता नहीं मिली, तो परिवार चलाना और अगली फसल की तैयारी करना मुश्किल हो जाएगा। फिलहाल गांवों में चिंता और बेचैनी का माहौल है। किसान आसमान की ओर देख रहे हैं इस उम्मीद में कि शायद अब सरकार उनकी टूटी उम्मीदों को सहारा दे।

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