टीबी मुक्त भारत की ओर तेज कदम: टेढ़ागाछ सीएचसी का निरीक्षण, गांव-गांव तक पहुंच रहा 100 दिवसीय अभियान

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जांच, उपचार और जागरूकता का एकीकृत मॉडल—एक्स-रे से लेकर एचडब्ल्यूसी स्तर तक सुदृढ़ हो रही व्यवस्था

लक्ष्य बड़ा है, इसलिए पहुंच भी व्यापक होनी चाहिए

किशनगंज/प्रतिनिधि

टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य केवल आंकड़ों में सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी समग्र पहल है, जिसमें हर संदिग्ध मरीज की पहचान, समय पर जांच और पूर्ण उपचार सुनिश्चित करना शामिल है। इसी सोच के साथ चल रहे 100 दिवसीय टीबी कार्यक्रम के तहत अब फोकस केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं, बल्कि गांव-गांव तक पहुंचने पर है।इसी क्रम में आज सीडीओ सह डीवीबीडीसीओ, किशनगंज डॉ. मंजर आलम ने टेढ़ागाछ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का दौरा कर कार्यक्रम की प्रगति का जायजा लिया। यह निरीक्षण इस बात का संकेत है कि अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए लगातार निगरानी और मार्गदर्शन किया जा रहा है।

टेढ़ागाछ में चयनित गांव: लक्षित रणनीति से तेज हो रही पहचान

टेढ़ागाछ प्रखंड में 100 दिवसीय टीबी कार्यक्रम के तहत कई गांवों का चयन कर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इन चयनित गांवों में घर-घर सर्वे के माध्यम से संभावित टीबी मरीजों की पहचान की जा रही है।आशा, एएनएम और स्वास्थ्य कर्मियों की टीम द्वारा प्रत्येक घर तक पहुंचकर लक्षणों की जानकारी ली जा रही है, ताकि कोई भी संदिग्ध मरीज छूट न जाए। यह लक्षित रणनीति अभियान को अधिक प्रभावी बना रही है।निरीक्षण के दौरान डॉ. मंजर आलम ने सीएचसी टेढ़ागाछ में चल रही जांच और उपचार व्यवस्थाओं का विस्तार से जायजा लिया। उन्होंने एक्स-रे सुविधा, बलगम जांच (सपुटम टेस्ट) और मरीजों के रजिस्ट्रेशन एवं फॉलो-अप की प्रक्रिया की समीक्षा की।


उन्होंने संबंधित कर्मियों को निर्देश दिया कि सभी संदिग्ध मरीजों की जांच समय पर सुनिश्चित की जाए और पॉजिटिव पाए जाने वाले मरीजों को तुरंत उपचार से जोड़ा जाए।

गांव से लेकर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर तक सक्रियता

100 दिवसीय टीबी कार्यक्रम के अंतर्गत केवल सीएचसी ही नहीं, बल्कि हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्तर पर भी गतिविधियां तेज कर दी गई हैं।एचडब्ल्यूसी पर प्रारंभिक स्क्रीनिंग और लक्षणों की पहचान ,संदिग्ध मरीजों को सीएचसी या उच्च केंद्र पर रेफर
नियमित फॉलो-अप और दवा सेवन की निगरानी,समुदाय में जागरूकता अभियान
इन सभी गतिविधियों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जांच और उपचार की सुविधा हर स्तर पर उपलब्ध हो।

“कोई भी संदिग्ध मरीज छूटना नहीं चाहिए”

निरीक्षण के दौरान डॉ. मंजर आलम ने कहा कि 100 दिवसीय टीबी कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है—हर संभावित मरीज की पहचान और उसे समय पर उपचार से जोड़ना। इसके लिए जरूरी है कि गांव स्तर पर सर्वे और जांच की प्रक्रिया पूरी गंभीरता से की जाए।एक्स-रे और बलगम जांच की सुविधा का अधिकतम उपयोग हो, और एचडब्ल्यूसी स्तर पर भी सक्रियता बनी रहे, ताकि कोई भी संदिग्ध मरीज छूट न जाए।

सामूहिक प्रयास से ही मिलेगा परिणाम

सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए यह 100 दिवसीय अभियान अत्यंत महत्वपूर्ण है। हम हर स्तर पर निगरानी और समन्वय सुनिश्चित कर रहे हैं, ताकि जांच, उपचार और फॉलो-अप में कोई कमी न रह जाए।स्वास्थ्य कर्मियों की सक्रिय भागीदारी और आम जनता की जागरूकता से ही हम इस लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।टेढ़ागाछ सीएचसी का यह निरीक्षण और गांव-स्तर तक चल रही सक्रियता यह दर्शाती है कि टीबी मुक्त भारत अभियान अब जमीनी हकीकत बनता जा रहा है।जब गांव-गांव तक जांच, हर स्तर पर उपचार और निरंतर निगरानी सुनिश्चित होगी, तभी इस अभियान को वास्तविक सफलता मिलेगी।100 दिवसीय कार्यक्रम के तहत उठाए जा रहे ये कदम न केवल वर्तमान को सुरक्षित बना रहे हैं, बल्कि भविष्य के लिए एक स्वस्थ और टीबी मुक्त समाज की नींव भी तैयार कर रहे हैं।

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