कदवा/कटिहार – प्रखंड के धनगामा पैक्स के किसानों के साथ हुई विभागीय साजिश का खुलासा हुआ है। जानकारी के अनुसार धनगामा पैक्स को परभेली पैक्स से टैग कर दिया गया है।इसके बाबजूद परभेली पैक्स द्वारा धनगामा के किसानों से अनाज की खरीददारी नहीं की गई।इस मामले ने पूरे सिस्टम को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।
एक ओर सरकार किसानों के अनाज को पैक्स के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने का दावा करती है,तो दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और हीं बयां करती है।किसान अपनी उपज लेकर दर-दर भटक कर औने-पौने दाम में बेचने को विवश हुए।ताज्जुब की बात तो यह है कि इनकी सुनने वाला भी कोई नहीं रहा। प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी अभिषेक कुमार सिंह ने बताया कि धनगामा पैक्स को परभेली पैक्स से टैग किया गया है।
लेकिन धनगामा के किसानों का अनाज क्यों नहीं खरीदा गया,इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। जिससे साफ जाहिर होता है कि जिम्मेदार अधिकारी जानबूझ कर अंजान बन रहे हैं या फिर अनभिज्ञता का चोला ओढ़े हुए हैं। बतातें चलें कि टैगिंग करने का उद्देश्य हीं किसानों के फसल को पैक्स के माध्यम से उचित मूल्य में खरीदा जाना था।लेकिन यह सिर्फ कागजी खानापूर्ति बनकर रह गयी।
यहाॅ ना तो खरीद केंद्र सक्रिय है और ना ही कोई सूचना जिस कारण किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। धनगामा के किसानों ने सहकारिता विभाग पर उन्हें ठगने का आरोप लगाते हुए कहा है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि व्यवस्था की नाकामी भी है। उन्होंने विभागीय पदाधिकारी पर व्यवसायियों के साथ मिली भगत का भी आरोप लगाया।
अब सवाल है कि इस मामले में क्या किसी की जवाबदेही तय होगी या फिर धनगामा पैक्स के किसानो की हकमारी होती रहेगी?क्या सिस्टम की लापरवाही से पैक्स मे अनाज बेचने का किसानो का सपना अधूरा हीं रह जाएगा?



























