अररिया में हर्षौल्लास पूर्वक माता सरस्वती की हुई पूजा, उल्लास और उमंग का माहौल

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नानु बाबा ने मां सरस्वती का दर्शन कर भक्तों के लिए सुख शांति की कामना की


शहर के विभिन्न जगहों पर हो रहे पूजा स्थल पर पहुंचे नानु बाबा


-देवताओं व असुरों ने भी बुद्धि ज्ञान के लिए मां सरस्वती कर चुके है आराधना

अररिया /अरुण कुमार

विश्व प्रसिद्ध मां खड्गेश्वरी महाकाली मंदिर के साधक नानु बाबा शहर के विभिन्न जगहों पर हो रहे सरस्वती पूजा स्थल पहुंचे। जहां मां सरस्वती का दर्शन कर भक्तों की सुख समृद्धि की कामना किये। वही भक्तों के द्वारा श्री नानू बाबा का भव्य स्वागत किया गया। साथ ही मां सरस्वती का जयकारा भी लगाया गया। साथ ही उमा देवी स्कूल में बद्रीनाथ मंदिर के तर्ज पर भव्य पंडाल बनाया गया था। जिसे नानू बाबा ने भी दर्शन कर काफी खुश हुए। नानु बाबा ने बताया कि माघ शुक्ल की पंचमी तिथि को आदिकाल से ही मां शारदा की पूजा का विधान है।

साहित्य संगीत कला की देवी विचारण, भावना संवेदना की त्रिविध शक्ति प्रदान करती है।महाकवि कालीदास, वरदाराचार्य ने उनकी सात्विक उपासना से ही अपनी शिथिल बुद्धि में तेज पायी थी। अत: सभी शास्त्रीय विधि विधान से पूजा संपादित कर इनकी कृपा की आस लगाये रहते हैं। हर विद्यार्थी की यही इष्ट देवी रही है। सुर में माधुर्य व रज से युक्त होने के कारण इनका नाम सरस्वती पड़ा।

इनकी कृपा से ही प्रथम नाद की उत्पत्ति हुई व बेजान सृष्टि में ध्वनियों की अनुगूंज सुनाई दी। केवल मानव ही देवी की उपासना नहीं करते, देवताओं व असुरों ने भी बुद्धि ज्ञान के लिए इनकी आराधना की थी। सुर-असुर मानव सभी बुद्धि ज्ञान, स्वर शब्द की पूर्णता के लिए इनके ही शरण में नतमस्तक होते हैं।

कुंभकरण का त्रेता युग में सोते रह जाना मां सरस्वती की ही इच्छा थी। अर्थात किसे विवेकी बना कर जगत कल्याण में लगाना है व किसकी बुद्धि का हरण कर लेना है यह मां के ही हाथों से संचालित होता है। मौके पर नानु बाबा के साथ पर हेमंत कुमार हीरा, अखिलेश दास, गुड्डू सिंह, विकास कुमार, रोशन दुबे, शंकर मालाकार, गोपाल कुमार आदि मौजूद थे।

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