जीविका से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं फूल कुमारी देवी, जूट से चटाई बनाकर सुदृढ़ कर रहीं परिवार की आर्थिक स्थिति

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किशनगंज/विजय कुमार साह

टेढ़ागाछ प्रखंड क्षेत्र में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में जीविका समूह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसी कड़ी में संकल्प सीएलएफ मटियारी की खुशबू बीओ के मार्गदर्शन में जीविका दीदी फूल कुमारी देवी स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं।बताते चलें कि फूल कुमारी देवी डाकपोखर पंचायत के खर्रा गांव, वार्ड संख्या 1 की निवासी हैं।

उन्होंने जीविका से जुड़कर “निखार जूट उत्पादन ग्रुप” में सदस्यता ली और अब घर बैठे जूट से सुंदर एवं मजबूत चटाई तैयार कर रही हैं। उनके द्वारा तैयार की गई चटाइयों की बाजार में अच्छी मांग है, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है।


फूल कुमारी देवी बताती हैं कि पहले परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन जीविका समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। जूट से चटाई बनाकर वे अब नियमित आय अर्जित कर रही हैं। बाजार में एक चटाई की कीमत लगभग 800 से 1200 रुपये तक मिल जाती है, जिससे घर की आर्थिक स्थिति पहले से काफी बेहतर हो गई है।

उन्होंने कहा कि बिहार सरकार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह ड्रीम प्रोजेक्ट महिलाओं के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है। जीविका समूह के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं।


फूल कुमारी देवी ने बताया कि जीविका समूह के जरिए महिलाओं को प्रशिक्षण,आर्थिक सहयोग और प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है, ताकि वे अपने हुनर को पहचानकर आगे बढ़ सकें। जीविका समूह महिलाओं को रोजगार के लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराता है, जिससे वे छोटे-छोटे उद्योग शुरू कर सकें।

उन्होंने कहा कि जीविका से जुड़कर उन्हें न सिर्फ आर्थिक मजबूती मिली है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब वे अपने घर-परिवार की जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभा रही हैं और अन्य महिलाओं को भी जीविका से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में जीविका समूह के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की पहल लगातार सफल हो रही है। इससे न सिर्फ महिलाओं का आर्थिक विकास हो रहा है, बल्कि गांवों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं। ऐसी प्रेरणादायक कहानियां यह साबित करती हैं कि जीविका समूह वास्तव में ग्रामीण महिलाओं के उत्थान और सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत माध्यम बनकर उभर रहा है।

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