न्यूज लेमनचूस

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रोगी और वैद?


एक महात्मा अपने शिष्यों के साथ  एक घर में भोजन करने गए .

भोजन में बहुत से दुराचारी भी आए थे । संत ने सबके साथ समभाव और स्नेह से बात की और आनंद पूर्वक भोजन किया ।

विरोधियों को यह समाचार ज्ञात हुआ तो उन्होंने संत के अनुयायियों को ताने दिए तुम्हारे गुरु को यह दुराचारी ही मिले बात करने के लिए क्या कोई इस गांव में सब सज्जन नहीं रहता ।

बात जब संत तक पहुंची तो विरोधियों के अज्ञानता की बात सोचकर वे दुखी हो गए और बोले भाई उनसे पूछो कि वैद्य की आवश्यकता किसे होती है ।

स्वस्थ व्यक्ति को या रोगी को

जितने भी दुराचारी है वह मानसिक आत्मिक रोग ही तो है जिसका निवारण करना संत का कर्तव्य है

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