एक ओर उजड़ते आशियाने… दूसरी ओर गंगा मैया के चरणों में छलक पड़े आंसू

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मनिहारी /कटिहार-प्रखंड क्षेत्र के धुरियाही पंचायत में गंगा कटाव के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई। जिसने हर देखने वाले की आंखें नम कर दीं। जिस गंगा किनारे कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, आज वहीं कटाव की गर्जना सुनाई दे रही है। कई परिवार अपने जीवनभर की कमाई समेटकर सुरक्षित ठिकाने की तलाश में हैं। लेकिन इस दर्द और बेबसी के बीच ग्रामीणों ने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा।

बूढ़ी माता पर्व के अवसर पर सैकड़ों महिलाएं और ग्रामीण गंगा घाट पर पहुंचे। किसी की आंखों में आंसू थे, तो किसी के हाथ जुड़े हुए थे।लोकगीतों की मधुर धुन के बीच हर जुबान पर बस एक ही पुकार थी—”हे गंगा मैया, हमारे घर-आंगन बचा लो, हमें उजड़ने से बचा लो।”


फूल, दीप और पूजा की थाली लेकर श्रद्धालुओं ने मां गंगा के चरणों में अपनी पीड़ा अर्पित की। कटाव की ओर टकटकी लगाए लोग मानो अपनी आंखों के सामने बिखरती दुनिया को रोकने की अंतिम कोशिश कर रहे थे। महिलाओं के गीतों में दर्द था, बुजुर्गों की आंखों में चिंता और बच्चों के चेहरों पर अनजाना डर साफ दिखाई दे रहा था।

धुरियाही की यह तस्वीर सिर्फ एक धार्मिक आयोजन की नहीं, बल्कि उस इंसानी दर्द की कहानी है, जहां एक तरफ गंगा लोगों की जमीन और आशियाने अपने साथ बहा रही है, तो दूसरी ओर वही लोग मां गंगा से अपने गांव, अपने खेत और अपनी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बचाने की गुहार लगा रहे हैं। यह दृश्य बताता है कि जब हर सहारा कमजोर पड़ने लगता है, तब इंसान की सबसे बड़ी ताकत उसकी आस्था और उम्मीद ही बन जाती है।

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