विद्यार्थी परिषद के मांग पर कटिहार डीएस कॉलेज बीएड विभाग में जांच समिति का गठन

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कटिहार – अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई की ओर से पूर्व कुलपति प्रो.राजनाथ यादव के कार्यकाल से ही अभाविप ने पूर्णिया विवि के कुलपति को आवेदन देकर गुहार लगायी थी । अभाविप के प्रांत सह मंत्री विनय कुमार सिंह ने पूर्णिया विवि के पूर्व कुलपति प्रो. राजनाथ यादव को एक आवेदन दे कर आवेदन में बताया था कि बीएड स्ववितपोषित है। यह पूर्णिया विवि के दो अंगीभूत महाविद्यालय फारबिसगंज व डीएस कॉलेज कटिहार में संचालित है।

बताया कि पीयू के वर्ष 2018 के स्थापना काल से अद्यतन व्यवसायिक पाठ्यक्रम संचालन के लिए कोई विनियमन नहीं बनाया गया है यह एक स्ववितपोषित व्यवसायिक पाठ्यक्रम है। अब तक पैतृक विवि भूपेन्द्र नारायण मंडल विवि मधेपुरा के निनियमन से ही संचालित है। उक्त विवि में बीएड पाठ्यक्रम में नामांकन के लिए अभी भी एक लाख रूपये की राशि शुल्क के मद में लिया जा रहा है।

जबकि पूर्णिया विवि द्वारा डेढ़ लाख की राशि शुल्क के मद में लिया जा रहा है। दोनों महाविद्यालय डीएस कॉलेज व फारबिसगंज कॉलेज फारबिसगंज के लिए प्रबंधन समिति का गठन किया जाए. ताकि दोनों महाविद्यालय के स्ववितपोषित पाठ्यक्रम बीएड का स्वच्छ और नियमानुकूल संचालन सुनिश्चित हो सके।

प्रो. राजनाथ यादव के कार्यकाल पूरा होने के बाद प्रो. विवेकानंद सिंह के आते ही एबीवीपी के प्रांत सह मंत्री विनय सिंह,विभाग सह संयोजक विक्रांत सिंह ने कुलपति को आवेदन देकर अवगत करवाया कि विवि द्वारा डीएस कॉलेज में बीएड विभाग में शिक्षकों व कमियों की नियुक्ति सहित विभिन्न स्तरों पर की गयी अनियमितता उजागर होने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाया है।

इस गंभीर मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर अविलंब कार्रवाई करने की जरूरत है। अंगीभूत महाविद्यालयों के बीएड विभाग में अविलम्ब शुल्क की राशि भूना मंडल के तर्ज पर एक लाख रूपये अधिकतम की जाये. ताकि इलाके के गरीब छात्र-छात्राएं भी बीएड में नामांकन करा सकें।एबीवीपी के मांग को कुलपति ने तुरंत संज्ञान में लेते हुए कहा कि पूर्णिया विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित दो बीएड कॉलेजों में शिक्षक-कर्मचारी नियुक्ति घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं की जांच होगी।

कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह के निर्देश पर पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। जांच डीएस कॉलेज कटिहार और फारबिसगंज कॉलेज में संचालित बीएड विभाग की होगी। कुलसचिव प्रो. अखिलेश कुमार ने पांच जून को पत्र जारी कर समिति के सदस्यों को उनके कार्य और दायित्वों से अवगत कराया है। पत्र में कहा गया है कि विश्वविद्यालय में प्राप्त शिकायत के आलोक में डीएस कॉलेज कटिहार बीएड विभाग में शिक्षकों एवं कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया तथा दोनों कॉलेजों के बीएड विभाग में वित्तीय अनियमितता से संबंधित आरोपों और तथ्यों की जांच अपेक्षित पाई गई है।

आदेश जारी होते ही डीएस कॉलेज बीएड विभाग में हड़कंप मच गया है। जिन शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति गलत तरीके से की गई है। उनके पांव फूलने लगे हैं। बताया जा रहा है कि वर्ष 2019-20 में हुई नियुक्तियों की फाइलें फिर से खुलेगी।

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