न्यायालय ने 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया
सागर चंद्रा/किशनगंज
अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाले आरोपी को न्यायालय ने 2.5 वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 10 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-प्रथम सुरेश प्रसाद सिंह की अदालत ने विदेशी अधिनियम के तहत दोषी पाये गये शफीउल आलम को सजा दी है।
जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर उसे एक माह अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। दोषी शफीउल आलम (43) अमेरिका के न्यू जर्सी राज्य के अटलांटा सिटी स्थित नॉर्थ हार्डफोर्ट एवेन्यू निवासी बताया जाता है। यह फैसला वर्ष 2025 के सत्र परीक्षण वाद संख्या 110 और दिघलबैंक थाना कांड संख्या 38/2024 से संबंधित मामले में सुनाया गया।
लोक अभियोजन सुरेन प्रसाद साहा ने बताया कि गत 30 मार्च 2024 को इंडो-नेपाल सीमा की सुरक्षा में तैनात एसएसबी 12वीं बटालियन के जवानों ने गुप्त सूचना पर दिघलबैंक बाजार में छापेमारी कर शफीउल आलम को गिरफ्तार किया था। जबकि घुसपैठ में सहयोग करने के आरोप में बंगाल के मालदा निवासी मुहम्मद मुखलेश को भी गिरफ्तार किया गया था।
गिरफ्तारी के दौरान शफीउल आलम के पास से नौ प्रकार के क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और कैसीनो कार्ड बरामद हुए थे। इसके अतिरिक्त, न्यू जर्सी का ड्राइविंग लाइसेंस, एक अमेरिकी डॉलर, नेपाली मुद्रा और नेपाल से संबंधित अन्य दस्तावेज भी मिले। जांच में यह तथ्य भी उभर कर सामने आया कि शफीउल आलम 17 वर्षों से अमेरिका में रह रहा था। वहीं मुखलेश ने बताया था कि एक लाख रुपये के एवज में उसे शफीउल आलम को नेपाल के काकरभिट्टा से भारत होते हुए बांग्लादेश पहुंचाना था।
शफीउल आलम एक वर्ष से नेपाल के काठमांडू स्थित एक होटल के कैसीनो में काम कर रहा था। उसका टूरिस्ट वीजा मई 2023 में और पासपोर्ट नवंबर 2023 में समाप्त हो चुका था। इसलिए उसे अवैध रूप से भारत के रास्ते बांग्लादेश भेजने की योजना थी।
शफीउल आलम की गिरफ्तारी के बाद देश की सुरक्षा एजेंसियों के कान भी खड़े हो गए थे। जांच एजेंसियों की पड़ताल में यह स्पष्ट हो गया कि शफीउल आलम के पास भारत में प्रवेश करने के लिए कोई वैध दस्तावेज नहीं था और उसने चोरी छिपे भारत में प्रवेश किया था। सुरक्षा एजेंसियों ने आवश्यकता पूछताछ के बाद उसे दिघलबैंक पुलिस के हवाले कर दिया था। जबकि दिघलबैंक थाना में कांड संख्या 38/2024 दर्ज करने के बाद उसे जेल भेज दिया गया था। लगभग दो वर्ष बाद मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने शफीउल आलम को दोषी मानते हुए सजा सुनाई है।























