प्यार में अंधी हुई बेटी तो जीते जी घर वालों ने किया श्राद्ध कर्म
श्रवण शर्मा /कोढ़ा /कटिहार – जिस बेटी को उंगली पकड़कर चलना सिखाया, उसने बॉयफ्रेंड के चक्कर में माता-पिता को ही पहचानने से इंकार कर दिया! दिल टूटने की यह अजीबोगरीब दास्तान कोढ़ा के रौतारा थाना क्षेत्र की है। जहाँ एक परिवार ने अपनी जीवित बेटी का ही ‘श्राद्ध कर्म’ अंतिम संस्कार कर डाला।
जहां माता-पिता और परिजनों ने अपनी ही जीवित बेटी का हिंदू रीति-रिवाज के साथ प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार श्राद्ध कर्म कर दिया। पूरे गांव की मौजूदगी में बकायदा अर्थी निकाली गई और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अंतिम यात्रा श्मशान घाट तक पहुंची। जानकारी के मुताबिक खुदना गांव की एक युवती कुछ समय पहले प्रेम प्रसंग के चलते अपने घर से अचानक लापता हो गई थी।
परिजनों ने उसकी तलाश में काफी भाग-दौड़ की और स्थानीय रौतारा थाना में गुमशुदगी की शिकायत भी दर्ज कराई। काफी प्रयासों के बाद पुलिस ने युवती को सकुशल बरामद कर लिया। जब लड़की को सामने लाया गया तो उसने अपने सगे माता-पिता और भाई-बहनों को पहचानने से साफ इनकार कर दिया और लड़के के साथ रहने की जिद पर अड़ी रही।
जिस बेटी को पाल-पोषकर बड़ा किया। उसके इस व्यवहार से माता-पिता और पूरे परिवार का दिल टूट गया। समाज में हुई बदनामी और गहरे सदमे के बाद परिजनों ने समाज के प्रबुद्ध लोगों की मौजूदगी में उस बेटी से अपने सभी वैधानिक और सामाजिक रिश्ते हमेशा के लिए खत्म करने का फैसला कर लिया।
जिस दिन उसने हमें पहचानने से मना किया, हमारे लिए वह उसी दिन मर गई।
सामाजिक मर्यादा और मान-सम्मान की खातिर अब उसका इस परिवार से कोई नाता नहीं है। इस फैसले के बाद, युवती का एक प्रतीकात्मक पुतला कुश का पुतला तैयार किया गया। उसे अर्थी पर सजाया गया और नम आंखों से पूरे गांव में उसकी अंतिम यात्रा निकाली गई। श्मशान घाट पर हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार पंडित जी की मौजूदगी में पुतले का दाह संस्कार किया गया। इस दौरान लड़की के पिता मुंचुन पासवान और दादा रामप्रकाश पासवान समेत सभी ग्रामीण बेहद भावुक नजर आए।
गांव के लोगों और महिलाओं का कहना है कि आज के समय में बच्चों द्वारा माता-पिता की अवहेलना करना बेहद दुखद है। ग्रामीणों ने परिवार के इस फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि जब संतान ही माता-पिता को छोड़ दे तो सामाजिक रिश्तों को बचाने के लिए ऐसे कड़े कदम उठाने पड़ते हैं।























