सिसकती तड़पती बिलखती है बेटी,यहां हर कदम रोज़ लुटती है बेटी। बयां क्या करूँ मैं दरिदों की खसलत,जन्म लेने से पहले ही मरती है बेटी। वो कान्हा वो मोहन कहाँ खो गए हैं,यहाँ द्रोपदी सी, न बचती है बेटी। ये सच है इसी के ही दम से गुलशन,मग़र कुछ दरिन्दों को खलती है बेटी। ये … Read more