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किशनगंज लोकसभा सीट पर जातीय समीकरण नही बल्कि धार्मिक समीकरण रखता है मायने

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किशनगंज/राजेश दुबे

70% मुस्लिम आबादी वाले बिहार के सीमावर्ती किशनगंज लोकसभा सीट पर दूसरे चरण में आगामी 26 अप्रैल को मतदान होगा जिसे लेकर सरगर्मी तेज हो चुकी है । चौक चौराहे एवं चाय की दुकानों पर मतदाता चुनाव को लेकर चर्चा करते देखे जा रहे है ।मतदाता अपने अपने हिसाब से नेताओ के जीत हार को लेकर दावा कर रहे है ।


मालूम हो की नामांकन वापसी की तिथि समाप्ति के बाद कुल 12 उम्मीदवार इस बार मैदान में है जिनके भाग्य का फैसला मतदाता करेंगे । गठबंधन के तहत जनता दल यूनाइटेड के खाते में इस बार यह सीट गई है और मुजाहिद आलम को पार्टी ने टिकट दिया है ।गौरतलब हो की 2019 के चुनाव में भी इस सीट से जेडीयू ने चुनाव लड़ा था ।

लेकिन मोदी लहर के बावजूद जदयू उम्मीदवार महमूद अशरफ को हार का सामना करना पड़ा था और कांग्रेस के डॉ जावेद आजाद यहां से सांसद निर्वाचित हुए थे ।

जबकि एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान तीसरे स्थान पर रहे थे ।मतों की अगर बात करे तो 2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 3 लाख 67 हजार 17 वोट मिले थे जबकि महमूद अशरफ को 3 लाख 32 हजार 551 वोट वही एआईएमआईएम के अख्तरुल ईमान को 2 लाख 95 हजार 29 वोट प्राप्त हुआ था। बताते चले की 2014 में भी इस सीट से कांग्रेस प्रत्याशी मौलाना असरारुल हक कासमी जीते थे और भाजपा प्रत्याशी डॉ दिलीप कुमार जायसवाल को हार का सामना करना पड़ा था तब जेडीयू ने अख्तरुल ईमान को यहा से अपना उम्मीदवार बनाया था । लेकिन ऐन वक्त पर अख्तरुल ईमान ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया था ।

किशनगंज लोकसभा सीट में 68 फीसदी मुस्लिम मतदाता है और 32 फीसदी हिंदू मतदाता ।पूरे देश में जहां मोदी की लहर चलती है लेकिन यहां के मतदाता भाजपा को हराने के लिए वोट डालते है ।कांग्रेस की यह परंपरागत सीट रही है ।हालाकि 1999 में एक बार भाजपा को यहां से जीत हासिल हो चुका है।

बताते चले की भारत नेपाल और बांग्लादेश सीमा से सटा किशनगंज लोकसभा सीट सामरिक दृष्टि कोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है और पूर्वोत्तर भारत का यह जिला प्रवेश द्वार माना जाता है ।जिले से नेपाल की लगभग 114 किलोमीटर की सीमा जुड़ती है वही महज 20 किलोमीटर की दूरी पर बांग्लादेश सीमा है । जिले में चार विधानसभा क्षेत्र किशनगंज, ठाकुरगंज, बहादुरगंज और कोचाधामन में कुल 1211331 मतदाता है. इसमें पुरुष मतदाता 624524, महिला मतदाता 5,86,759 और अन्य मतदाता 48 है ।इस बार 18 से 19 आयु वर्ग के कुल मतदाता 20777 है । साथ ही 20 से 29 आयु वर्ग के कुल मतदाता 290053 मतदाता है।जबकि पूर्णिया जिले की दो विधान सभा सीट अमौर और बायसी भी इस लोकसभा क्षेत्र में पड़ती है।

जिले की समस्याओं पर अगर बात करे तो शिक्षा क्षेत्र में यह लोकसभा क्षेत्र आज भी पूरे देश में निचले पायदान पर है जिले की समक्षरता दर सिर्फ 57.4% है ।वही बाढ़ और कटाव से हर साल सैंकड़ों एकड़ जमीन नदी में विलीन हो जाती है ।जिले की टेढ़ागाछ,कोचाधामन,पोठिया प्रखंड सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित इलाका है जहा हर साल महानंदा, रेतुआ नदी कहर ढाती है ।कटाव से बचाव के लिए नेताओ द्वारा हर साल दावे किए जाते है लेकिन नतीजा सिफर ही रहा है ।साथ ही प्रमुख मुद्दों में पलायन भी शामिल है ।रोजगार की व्यवस्था नहीं होने की वजह से युवा अन्य राज्यों में पलायन को मजबूर होते है ।लेकिन बाढ़ कटाव या शिक्षा दर,पलायन कभी मुद्दा नहीं बन पाया ।
इस बार के चुनाव में एनडीए उम्मीदवार मुजाहिद आलम
जहा विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे है वही कांग्रेस और एआईएमआईएम सांप्रदायिक ताकतों को हराने के मुद्दे पर चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे है ।

2024 चुनावो में कांग्रेस ,जदयू और एआईएमआईएम के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होगा।एआईएमआईएम से अख्तरुल ईमान फिर इस बार चुनावी मैदान में है ।जबकि कांग्रेस से डॉ जावेद आजाद उम्मीदवार है ।जातिगत समीकरण की बात करे तो तीनो ही पार्टियों के उम्मीदवार सुरजापुरी समुदाय से आते है । यहां जातीय समीकरण नही बल्कि धार्मिक समीकरण पर चुनाव लड़े जाते रहे है।चुनाव में M फैक्टर और H फैक्टर महत्वपूर्ण हो जाता है ।इस चुनाव में जनता दल यूनाइटेड भाजपा के परंपरागत वोट को अपनी झोली में लाने में कितना सफल होती है यह तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन चुनाव में तीनो उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर होगी ।

किशनगंज लोकसभा सीट पर जातीय समीकरण नही बल्कि धार्मिक समीकरण रखता है मायने

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