रेल प्रशासन करें उच्च स्तरीय जांच – महबूब आलम
बारसोई/कटिहार – भाकपा माले के पूर्व विधायक महबूब आलम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि आरपीएफ एवं रेल मजिस्ट्रेट की मिली भगत से अवैध वसूली का धंधा फल-फूल रहा है। यह आरोप पूर्व विधायक महबूब आलम ने लगाते हुए रेलवे प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने कहा कि यात्रियों के साथ ज्यादती एवं उत्पीड़न की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।बिना टिकट यात्रियों पर कार्रवाई के नाम पर शोषण का आरोप पूर्व विधायक ने कहा कि यदि कोई यात्री किसी कारणवश प्लेटफॉर्म पर बिना टिकट पहुंच जाता है तो नियमानुसार उससे जुर्माना वसूला जाना चाहिए।
लेकिन आरोप है कि रेलवे सुरक्षा बल आरपीएफ द्वारा कई मामलों में जरूरत से ज्यादा कठोर कार्रवाई करते हुए यात्रियों को नॉन-बेलेबल धाराओं में केस दर्ज कर कटिहार भेज दिया जाता है, जहां कथित रूप से उनका शोषण किया जाता है और अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है।अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई करने का आरोप महबूब आलम ने कहा कि आरपीएफ अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर भी कार्रवाई कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्टेशन के सामने यात्रियों को लाने-ले जाने वाले वाहन चालकों को भी आरपीएफ द्वारा परेशान किया जाता है तथा उन्हें नॉन-बेलेबल सेक्शन में डालकर बड़ी कार्रवाई के लिए कटिहार भेज दिया जाता है।उन्होंने कहा कि आरपीएफ को ट्रेन अथवा प्लेटफॉर्म के बाहर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है, बावजूद इसके हस्तक्षेप किया जा रहा है उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि स्थानीय आरपीएफ अधिकारी कटिहार के अधिकारियों से मिलकर यात्रियों से अवैध राशि उगाही कर रहे हैं।
उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।बारसोई में रेल मजिस्ट्रेट की बहाली की उठाई मांगउन्होंने कहा कि बारसोई में रेल मजिस्ट्रेट की बहाली नहीं होने से यात्रियों को अनावश्यक रूप से कटिहार जाना पड़ता है, जिससे परेशानी बढ़ती है।
उन्होंने मांग की कि बारसोई में रेल मजिस्ट्रेट की तत्काल बहाली की जाए या फिर सिविल कोर्ट के मजिस्ट्रेट को ही रेल मामलों की सुनवाई का अधिकार दिया जाए।जन आंदोलन की चेतावनी महबूब आलम ने स्पष्ट कहा कि आरपीएफ की मनमानी और ज्यादती किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो जन आंदोलन किया जाएगा।


























