शराबबंदी के बीच कोढ़ा में अवैध शराब कारोबार का दावा,मुख्य पार्षद ने उठाए गंभीर सवाल

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जान के खतरे का हवाला देकर आर्म्स लाइसेंस की मांग, मंत्री को सौंपा आवेदन

कटिहार – जिले के कोढ़ा नगर पंचायत से एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। जिसने बिहार में लागू शराबबंदी कानून पर सवाल खड़े कर दिये हैं। कोढ़ा नगर पंचायत के मुख्य पार्षद सह पूर्व जदयू प्रखंड अध्यक्ष धीरज कुमार सिंह ने राज्य सरकार के मंत्री खान एवं भूतत्व विभाग सह प्रभारी जिला स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्री को एक आवेदन सौंपते हुए अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।

मुख्य पार्षद द्वारा दिए गए आवेदन में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि कोढ़ा क्षेत्र में खुलेआम शराब की बिक्री हो रही है। यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है और सरकार इसे सख्ती से लागू करने का दावा करती रही है। ऐसे में सत्ताधारी दल से जुड़े एक जनप्रतिनिधि द्वारा ही इस प्रकार का आरोप लगाया जाना राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।

धीरज कुमार सिंह ने अपने आवेदन में बताया है कि उन्होंने लगभग तीन वर्ष पूर्व अपनी सुरक्षा के मद्देनजर आर्म्स हथियार लाइसेंस के लिए आवेदन दिया था। उन्होंने कहा कि सभी आवश्यक जांच प्रक्रियाएं पूरी होने के बावजूद अब तक उन्हें लाइसेंस निर्गत नहीं किया गया है। इससे वे लगातार असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।उन्होंने लिखा है कि क्षेत्र में सक्रिय शराब तस्करों से उन्हें जान का खतरा बना हुआ है।

मुख्य पार्षद होने के नाते उन्हें लगातार क्षेत्र में जनसंपर्क और विकास कार्यों के लिए जाना पड़ता है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। उन्होंने मंत्री से अनुरोध किया है कि उनके आवेदन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए जल्द से जल्द आर्म्स लाइसेंस जारी किया जाए।


इस पूरे मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर राज्य सरकार शराबबंदी को अपनी बड़ी उपलब्धि बताती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर अवैध शराब के कारोबार के आरोप सामने आ रहे हैं। यदि मुख्य पार्षद के दावे सही हैं, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। स्थानीय लोगों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

लोगों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। तो आम नागरिकों की सुरक्षा का क्या हाल होगा। वहीं प्रशासनिक स्तर पर अभी तक इस आवेदन को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना यह होगा कि संबंधित मंत्री और जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और मुख्य पार्षद की सुरक्षा तथा अवैध शराब कारोबार के आरोपों पर क्या कार्रवाई की जाती है।

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