खेतों के बीच बना स्कूल पर सड़क नदारद,जान जोखिम में डालकर पढ़ने जा रहे मासूम बच्चे

SHARE:

कोढा /कटिहार- कोढ़ा नगर पंचायत के वार्ड नंबर 3 स्थित प्राथमिक विद्यालय गेराबाड़ी बस्ती की मौजूदा तस्वीर सरकारी व्यवस्थाओं की हकीकत बयां कर रही है। एक ओर जहां सरकार शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासों का दावा करती है। वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाओं की कमी इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। इस विद्यालय तक पहुंचने के लिए आज तक पक्की सड़क का निर्माण नहीं कराया गया है। जिसके कारण छोटे-छोटे बच्चों को रोजाना कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।


विद्यालय का भवन खेतों के बीच बनाया गया है। लेकिन वहां तक जाने के लिए कोई समुचित रास्ता उपलब्ध नहीं है। बच्चे रोजाना पगडंडी और जंगलनुमा रास्तों से होकर स्कूल पहुंचते हैं। यह रास्ता न केवल असुविधाजनक है। बल्कि बच्चों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बना हुआ है। खासकर छोटे बच्चों के लिए यह सफर किसी चुनौती से कम नहीं होता।बरसात के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते हैं।

खेतों में पानी भर जाता है, पगडंडी कीचड़ में तब्दील हो जाती है और फिसलन इतनी बढ़ जाती है कि कई बार बच्चे गिरकर चोटिल हो जाते हैं। कई जगहों पर पानी भरे खेतों के बीच से गुजरना पड़ता है, जिससे अभिभावकों की चिंता और बढ़ जाती है। ऐसे हालात में बच्चों के लिए स्कूल पहुंचना किसी परीक्षा से कम नहीं होता।
स्थानीय ग्रामीणों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि सरकार ने विद्यालय भवन बनाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा और सुविधा की ओर ध्यान नहीं दिया गया।

उनका कहना है कि शिक्षा केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बच्चों को सुरक्षित और सुगम रास्ता उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है। अभिभावकों की चिंता भी लगातार बढ़ती जा रही है। वे हर दिन इस डर में रहते हैं कि कहीं उनके बच्चे रास्ते में किसी हादसे का शिकार न हो जाएं। कई अभिभावकों ने बताया कि बरसात के दिनों में वे अपने बच्चों को स्कूल भेजने से भी कतराते हैं, क्योंकि रास्ता बेहद खतरनाक हो जाता है।

इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है और उनकी नियमित उपस्थिति भी प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अविलंब विद्यालय तक पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और सुगम मार्ग मिल सके।

यह सवाल अब उठने लगा है कि जब सरकार ने बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिया है, तो क्या उन्हें सुरक्षित वातावरण और सुविधाजनक पहुंच उपलब्ध कराना उसकी जिम्मेदारी नहीं है? अब देखना यह है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या को कब तक नजरअंदाज करते हैं या फिर कब बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ठोस कदम उठाए जाते हैं।

Leave a comment

सबसे ज्यादा पड़ गई