किशनगंज/विजय कुमार साह
टेढ़ागाछ प्रखंड क्षेत्र में विद्या, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती की पूजा पूरे श्रद्धा, उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है। प्रखंड के सरकारी एवं गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों, विद्यालयों,कोचिंग संस्थानों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा भव्य रूप से सरस्वती पूजा का आयोजन किया गया है।
पूजा को लेकर क्षेत्र का माहौल भक्तिमय बना हुआ है और हर ओर “जय मां सरस्वती” के जयघोष गूंज रहे हैं।सुबह से ही पूजा पंडालों में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, अभिभावकों एवं महिलाओं की भारी भीड़ देखी जा रही है। श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प, अक्षत, धूप-दीप अर्पित कर विद्या, विवेक और उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं।
विशेष रूप से छात्र-छात्राओं में पूजा को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। बच्चों ने मां सरस्वती से परीक्षा में सफलता और ज्ञान-वृद्धि की प्रार्थना की।सरस्वती पूजा के अवसर पर कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा रहा है। विद्यालयों और संस्थानों में भजन-कीर्तन, संगीत, नृत्य, कविता पाठ एवं नाटक जैसे कार्यक्रम प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जिनमें स्थानीय प्रतिभाओं ने अपनी कला का प्रदर्शन कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।
इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूजा के उत्सव को और भी आकर्षक बना दिया है।वहीं, पूजा को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। प्रखंड एवं थाना स्तर के अधिकारियों द्वारा विभिन्न पूजा पंडालों का निरीक्षण किया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई, बिजली एवं अग्निशमन संबंधी इंतजामों की बारीकी से जांच की जा रही है। प्रशासन ने आयोजकों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए नियमों का पालन करने की अपील की है, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी पूजा पंडालों का भ्रमण कर आयोजकों का उत्साहवर्धन किया। लोगों ने प्रशासन की सक्रियता की सराहना करते हुए कहा कि इससे पूजा उत्सव शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो रहा है।कुल मिलाकर टेढ़ागाछ प्रखंड क्षेत्र में सरस्वती पूजा आस्था, संस्कृति और सौहार्द का प्रतीक बनकर मनाई जा रही है। यह पर्व न केवल विद्या की आराधना का अवसर है, बल्कि समाज को एकजुट करने और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का भी संदेश दे रहा है।


























