किशनगंज /प्रतिनिधि
युग निर्माण योजना विचार क्रांति अभियान विश्व व्यापी कार्यक्रम के तहत बुधवार को कोचाधामन प्रखंड अंतर्गत कलानागिन में एक दिवसीय प्रज्ञा सह गायत्री यज्ञ का आयोजन गौतम कुमार सिंह की देखरेख में भाई हरिश्चंद्र की टोली द्वारा दिव्य वातावरण में संपन्न हुआ।
प्रज्ञा संगीत भजन से वातावरण गुंजित हो उठा।
मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित वरिष्ठ प्रज्ञा पुत्र सेवानिवृत्ति प्रधानाध्यापक राष्ट्रपति पुरस्कार सहित अन्य अन्य रचनात्मक कार्यों के लिए कुल 13 पुरस्कारों से सम्मानित श्यामानंद झा ने कहा जिस शिक्षा के द्वारा हमारा जीवन निर्माण हो सके मनुष्य का चिंतन चरित्र और विचारों का सामंजस्य स्थापित हो सके वास्तव में वही शिक्षा है। संस्कार के बिना शिक्षा अधूरी है।

मानव जीवन निर्माण में आध्यात्मिकता का होना अति आवश्यक है। गायत्री को गुरु मंत्र माना गया है। गायत्री को देवमाता वेद माता और विश्व माता कहा गया है। इसलिए इसकी उपासना जन-जन को करनी चाहिए। इस मंत्र की नियमित उपासना से मनुष्य शक्तिशाली तेजस्वी होते हुए बुद्धि निर्मल शुद्ध पवित्रता स्वत: आ जाती है। आगे बोलते हुए उन्होंने कहा धर्म तंत्र से लोक शिक्षण का हमारा उद्देश्य है मनुष्य में देवत्व का उदय और धरती पर स्वर्गिक वातावरण बनाना। वेद का अर्थ है ज्ञान और ज्ञान बुद्धि की साधना का परिणाम है इसलिए गायत्री वेद माता कहा जाता है। भारतीय संस्कृति तथा सभ्यता के मूल स्रोत वेद अर्थात ज्ञान है और ज्ञान बुद्धि की देन है। शास्त्र कारों ने बुद्धि को सर्वोपरि बल बताया है। हमारा धर्म हमारी संस्कृति विचार प्रधान है बुद्धि प्रदान है वेद प्रधान है अर्थात ज्ञान के द्वारा प्रेषित है वह किसी प्रकार के आग्रह को लेकर नहीं चलती। दिव्य वृत्तियों वाले मनुष्य जहां कहीं भी रहते हैं वहां स्वर्ग जैसी परिस्थितिया’स्वत :बन जाती है।

अंतरिक्ष से भारत की बेटी वापस होने के बाद आदरणीया सुनीता विलियम्स ने अध्यात्म शक्ति के प्रति आस्था जताते हुए उन्होंने कहा प्राणायाम ध्यान धारणा और गीता सद्ग्रंथ के बल पर मैं अपना जीवन अंतरिक्ष में 9 महीने 14 दिनों तक सुरक्षित रख सकी। कहाजा सकता है अध्यात्म सर्वोपरि शक्ति है। आयोजित यज्ञ कार्यक्रम के तहत उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन के लिए विशेष आहुतियां परिजनों द्वारा समर्पित की गई एवं बधाई भी।
आयोजन को सफल बनाने में प्रखंड समन्वय पंचानन्द सिंहा उमेश चंद्र सिंह साबूलाल सिंह सिप्टी कुमार सिंह वीणा देवी सोहनलाल दास सुहानी देवी हिना देवी कृष्ण मोहन ठाकुर धनंजय प्रसाद सिंह देवेंन लाल दास ब्रह्मदेव यादव तारा सिंह बृजमोहन सिंह सीता देवी अनु देवी किशन लाल मंडल एवं राजेंद्र दास आदि की भूमिका काफी सराहनीय रही।