सरकार के पास अर्थव्यवस्था के उद्धार के लिए उपयुक्त विचारों की कमी है – भारतीय मजदूर संघ

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राजेश दुबे

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की अनुसांगिक संगठन भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने देश के 8 सेक्टर के निजीकरण करने की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की घोषणाओं पर जोरदार विरोध जताया है। भारतीय मजदूर संघ ने वित्त मंत्री की घोषणाओं के लिहाज से शनिवार का दिन देश के लिए दुखद करार दिया है। बीएमएस ने कहा है कि 8 क्षेत्रों के निजीकरण की घोषणा कर सरकार ने बताया है कि उसके पास विचारों की कमी है। निजीकरण राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है। बीएमएस ने कहा कि फेल विचारों से देश की अर्थव्यवस्था नहीं सुधरने वाली है।संकट के समय सरकार के पास अर्थव्यवस्था के उद्धार के लिए उपयुक्त विचारों की कमी है। कोयला, खनिज, रक्षा उत्पादन, हवाई क्षेत्र प्रबंधन, हवाई अड्डे, विद्युत वितरण, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा जैसे 8 सेक्टर को लेकर सरकार का कहना है कि निजीकरण के अलावा इसका कोई विकल्प नहीं है। यह सरकार के पास विचारों की कमी को दर्शाता है ।साथ ही संघ ने कहा कि भारतीय मजदूर संघ ने कहा कि कोल सेक्टर के निजीकरण के लिए 50 हजार करोड़ आवंटित करना अत्यधिक आपत्तिजनक है। बॉक्साइट और कोयला ब्लॉक सहित 500 खनन ब्लॉकों की नीलामी राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है। रक्षा खर्च को कम करने के नाम पर डिफेंस सेक्टर में एफडीआई को 49 से 74 प्रतिशत तक बढ़ाना और आयुध फैक्ट्री बोर्ड का निजीकरण करना भी आपत्तिजनक है। 
मजदूर संघ ने कहा कि 13 हजार करोड़ रुपये की धनराशि के लिए छह हवाई अड्डों की नीलामी और मेट्रो शहरो में ऊर्जा वितरण कंपनियों का निजीकरण भारत में लंबे समय के लिए हानिकारक है। भारतीय मजदूर संघ ने कहा, अंतरिक्ष का निजीकरण हमारी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हो सकता है। भारतीय स्टार्ट अप अंतरिक्ष की चुनौतियों को उठाने के लिए इतने सुसज्जित नहीं हैं। यहां तक कि परमाणु ऊर्जा को पीपीपी मोड में परिवर्तित किया जा रहा है जो निजीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। निजीकरण का रास्ता विदेशीकरण की ओर जाता है। भारतीय मजदूर संघ के  राष्ट्रीय सचिव बृजेश उपाध्याय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह जानकारी साझा की है ।

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