व्यंग्य /डॉ सजल प्रसाद
” बी पॉजिटिव .. बी पॉजिटिव ..बी पॉजिटिव ” – बड़बड़ाता हुआ ख़बरी लाल बहुत तेज कदमों से अस्पताल की तरफ रूख़ करके घर से रुख़सत हुआ था। उसके चेहरे पर घबराहट की झलक थी। मन ही मन सोच रहा था कि पता नहीं आज क्या होगा !
फिर, उसे याद आया कि घर से रुखसती के पहले पत्नी ने थाली सजाकर उसकी आरती उतारी थी और माथे पर रोली-चंदन का टीका लगाकर उसपर अरवा चावल के कुछ दाने भी चस्पां कर दिए थे, जैसे कि उसका पति किसी युद्ध पर जा रहा हो !
ख़बरी लाल की चाल तेज थी तो उसका दिमाग भी तेज चलने लगा था। दिमाग पर जोर डाल कर वह फ्लैश बैक में चला गया और याद करने लगा कि आरती उतारते वक्त उसकी पत्नी मुस्कुरा रही थी या उसकी आँखें सजल थीं !
” अरे स्साला … ! ” – कहते हुए ख़बरी लाल ने अपने माथे पर अपने हाथों से ही ठुनका मारा … जैसे कुछ याद करने की कोशिश कर रहा हो। ऐसा लग रहा था कि शायद वह कन्फ्यूज हो गया है .. उसे कुछ याद ही नहीं आ रहा था कि पत्नी मुस्कुरा रही थी या गमगीन थी !
” बाद में घर पर लगे सीसीटीवी कैमरा की शूटिंग रिवाइंड कर देख लेंगे ” – मन में ही ऐसा सोचकर उसने ख़ुद को जैसे तसल्ली दी। लेकिन, घबड़ाहट की स्थिति में बुरे ख़्याल पहले आते हैं। उसे याद आया कि उसकी पत्नी परसों ही पड़ोस में रहने वाले चमनलाल से हँस-हंस कर कैसे बतिया रही थी। कुछ और बुरे ख्याल उसे आए पर, उसे लगा कि उसके बगैर भी पत्नी का काम चल जाएगा और वह खुश रह लेगी।
” ये भी तो पॉजिटिव थिंकिंग है ! ” – अपने मन में यही सोचकर ख़बरी लाल जैसे खुद की पीठ थपथपाने लगा था।
” बी पॉजिटिव … बी पॉजिटिव …बी पॉजिटिव ” – ख़बरी लाल यही बड़बड़ाता हुआ आख़िरकार अस्पताल के अंदर घुसा और कोविड 19 जाँच केन्द्र में उसने अपना आरटीपीसीआर टेस्ट कराने के लिए अर्जी दी। थोड़ी देर बाद उसका सैम्पल ले लिया गया। रिपोर्ट मोबाइल फोन पे 72 घंटे बाद आ जाएगी, ऐसा उसे बताया गया।
लेकिन, स्वनामधन्य ख़बरी लाल भला कैसे चुप बैठ सकता था ! उसने लैब के टेक्नीशियन से संपर्क साधा और 100 रुपये का एक नोट उसकी जेब में जबरदस्ती घुसेड़ कर कहा – ” आज शाम में ही कोविड 19 टेस्ट रिपोर्ट मिलना चाहिए। “
” सर ! अभी बहुत टाइट सिचुएशन है .. इतना आसान नहीं है जितना आप सोच रहे हैं। ” – टेक्नीशियन ने मुँह बनाकर उत्तर दिया। इतना सुनते ही ख़बरी लाल ने 500 का नया करेंसी नोट झलकाया तो टेक्नीशियन का स्वर भी बदल गया। दो उँगलियों से 500 का नोट लेकर उसने रात नौ बजे तक घर में इंतजार करने को कहा।
कोरोना की दूसरी लहर के बीच पड़ोसी राज्य में सभी राजनैतिक दलों की धुंआधार रैलियों की रिले रेस और ग्लैमरस रोड शो की प्रतिद्वंद्विता की झलक को कवर करने के प्रीपेड एसाइनमेंट को सफलतापूर्वक अंजाम देने के बाद ख़बरी लाल चैन की नींद सो ही रहा था कि पड़ोसी राज्य के दूसरे ख़बरी लाल मित्र ने मोबाइल फोन पर बताया – ” हिल स्टेशन के पंचतारा रिसोर्ट में जिस एक्ट्रेस टर्न पॉलिटिशियन की रेव पार्टी में जिन लोगों के साथ रात भर मस्ती किए, वे सब कोरोना पॉजिटिव हुए है। “
इसलिए ख़बरी लाल आरटीपीसीआर टेस्ट कराने गया था। आज ख़बरी लाल खुद की खबर जल्द से जल्द पाने के लिए बेचैन था। ख़ैर, रात नौ बजे रिपोर्ट मिलने के बाद ख़बरी लाल के बेक़रार दिल को जैसे क़रार आया। ख़बरी लाल की कोविड 19 टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव थी। उधर एक्ट्रेस टर्न पॉलिटिशियन की टेस्ट रिपोर्ट भी निगेटिव थी। यही कनेक्शन जोड़कर ख़बरी लाल मन ही मन मुस्काया।
अब जाकर उसे समझ में आया कि लाइफ में ‘पॉजिटिव थिंकिंग’ कितनी जरूरी है और इसका ‘निगेटिव’ नतीजा सामने आने पर कितना सुखद लगता है। ख़बरी लाल अब बेखौफ था। कोरोना उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकता। इसलिए वह अपने को फिट व फाइन महसूस करने लगा था।
इधर, कोरोना की सेकेंड इंट्री के बाद देर रात में ही सायरन बजाती सरकारी गाड़ियों का काफिला शहर में प्रमुख मार्गों से गुजरने लगा और चौक-चैराहों पर यह काफिला कुछ देर के लिए ठहर जाता। यहीं चौक पर एनाउंसमेंट किया गया – ” कोविड चेन को रोकने के लिए वीकेंड लॉक डाउन लगाने का फैसला लिया गया है .. इसलिए कोई भी अपनी दुकान-प्रतिष्ठान न खोले .. आदेश का उल्लंघन करने पर एफआईआर दर्ज होगी और सजा भी दिलाई जाएगी। “
आधी रात में ही ख़बरी लाल की मोबाइल फोन की घंटी बजने लगी थी। नींद में औंघियाते ख़बरी लाल ने मोबाइल फोन का स्पीकर चालू कर दिया और बतियाने लगा।
” ख़बरी लाल ! .. सुन रहे हो न ! वीकेंड लॉक डाउन लग चुका है .. मोटा आसामी पर पैनी नज़र रखो और खबर करो। “
सुबह-सवेरे ही ख़बरी लाल घर से मुखबिरी के धंधे के लिए निकल चुका था। बीते साल कोरोना काल में ही वह समझ चुका था कि किन-किन दुकानों व प्रतिष्ठानों में कब-कब सरकारी प्रतिबंध का उल्लंघन होता है और कैसे उसे ट्रैप करना है। इसलिए कोरोना टू के कार्यकाल में लॉक डाउन के पहले ही दिन मुखबिरी की दिल खुश करने वाली बोहनी हुई। एक बड़े प्रतिष्ठान में एफआईआर न करने के नाम पर पांच पेटी में सौदा फाइनल हुआ। वायदे के मुताबिक 5 परसेंट सुबह-सुबह ख़बरी लाल की जेब की शोभा बढ़ा रहे थे। ख़बरी लाल ने अपने ही सम्मान में कसीदे पढ़े और बायीं आँख दबाकर एक कहावत भी कही – ” माल-ए-मुफ्त, दिल-ए-बेरहम।” यही नहीं, ख़बरी लाल ने जैसे खुद से ही कहा – “कहावत से हमारी मंशा जाहिर है जनाब !
पश्चिम बंगाल बॉर्डर पर कुछ रोज पहले ही ख़बरी लाल ने जो अर्जित किया, उसकी मिसाल नहीं है। ख़बरी लाल को पता चला कि दो इनोवा गाड़ियों में सवार होकर 10 अमीरजादे बॉर्डर पर लाइन होटल में बिहार में प्रतिबंधित ड्रिंक्स का सेवन कर रहे हैं। दो घंटे बाद शहर में घुसने वाले कच्चे रास्ते पर दोनों इनोवा गाड़ी घेर ली गई थी। और बाद में, सभी दस अमीरज़ादों के बाप-भाई पाँच-पांच पेटी लेकर पहुंचे, तब वे छूटे।
अगली ही सुबह ख़बरी लाल ने अपने राज्य की सरकार को लाख-लाख धन्यवाद दिया और मंदिर में जाकर प्रार्थना भी की कि सरकार युग-युग तक चलती रहे। आखिर मुखबिरी के रोजगार में 10 परसेंट की दर से ख़बरी लाल को पाँच पेटी जो मिल गई थी, तो इतना तो लाजिमी है। सरकार के अबतक अडिग रहे एक फैसले से उसके सहित शासन-प्रशासन की बाँछें खिली हुई रहती हैं।
वस्तुतः ख़बरी लाल बहुत पहले सही अर्थ में ख़बरी लाल ही था लेकिन, जब उसे पता लगा कि मुखबिरी में कमीशन नेट फाइव परसेंट और स्पेशल मुखबिरी में 10 परसेंट तक मिल सकता है तो फिर उसने अभाव को ही अवसर बना लिया और कोरोना को अवसर बनाते हुए मुखबिरी के धंधे में उतर गया।
कब वह पॉजिटिव से निगेटिव हो गया … ये बात उसे खुद पता नहीं चली। जब कोई ख़बरी लाल का ज़मीर कुरेदने लगता है तो, उसकी दलीलें होती हैं – ” … सब माया है ! … मायावी संसार है .. माया के आगे सब बेबस और लाचार है … कोई इससे बच नहीं सकता .. योग सिखाने वाले गुरु कब कॉरपोरेट गुरु हो गए .. ये किसी को पता ही नहीं चला …कोरोना काल में मशहूर एवं बेहद उपयोगी पीपीटी किट को राज नेताओं ने कब मुँह छुपाने का नायाब बुर्का बना लिया .. यह भी लोगों को पता ही नहीं चला … किस तरह पीपीपी मॉडल लागू करने के बहाने वेलफेयर स्टेट के उसूलों के ख़िलाफ़ जाकर जनता की जेब ढ़ीली करने की रणनीति बनाई गई … ये भी पता नहीं चला … किस तरह मुनाफा कमा कर देने वाली नवरत्न कंपनियां घाटे में ढकेल दी गई … ये भी किसी को पता नहीं चला … बीएसएनएल का भट्टा बैठाकर किस तरह जिओ को जीने दिया गया .. ये भी पता नहीं चला … सरकारी उपक्रम कब प्राइवेट हाथों में गिरवी रखे चले गए … ये भी पता नहीं चला … न्याय की देवी के तराजू का पलड़ा कब मनचाही दिशा में झुका लिया गया … पता नहीं चला …! “
यह कहकर ख़बरी लाल थोड़ा सुस्ताता है। अगले ही पल वह फिर सामने वाले से कहने लगता है – ” सियासत के नाम पर कैसे प्रभु श्रीराम को कठघरे में खड़ा कर दिया गया … ये भी पता नहीं चला .. जातियों के वोटबैंक के लिए समाज को कैसे बांटा गया .. ये भी पता नहीं चला … कैसे एक परिवार के लिए लोकतंत्र में राजतंत्र का आभास कराया गया … ये भी पता नहीं चला …कैसे बाप के बाद बेटों को राजनैतिक पार्टी की गद्दी विरासत में मिलती गई … ये भी पता नहीं चला … कैसे सत्ता को सेवा की बजाय मेवा खाने का जरिया बनाया गया … क्या ये आपको पता चला ?
यह सब कहते हुए ख़बरी लाल का चेहरा तमतमा जाता है तो अंत में यही कहकर झिंझोर देता है – ” यदि ये सब आपको नहीं पता तो , ये भी नहीं समझ पाएंगे कि आपका ख़बरी लाल कब, क्यों और कैसे मुखबिर बन गया। “
सम्प्रति :
एसोसिएट प्रोफेसर व
विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग
मारवाड़ी कॉलेज, किशनगंज (बिहार)।