अमरीकी दंगो के बीच ! कौन है जो हिंदुस्तान को भी दंगो की आग में झोकना चाहता है ?

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राजेश दुबे

अमरीका दंगो कि आग में जल रहा है ।लेकिन कुछ लोग हिंदुस्तान को भी दंगो कि आग में झोंकने की साजिश में जुटे हुए है । मालूम हो कि ट्विटर पर Muslimlivesmatter और Dalitlivematters को ट्रेंड कर असहिष्णु गैंग जिसे देश में डर लगता था , के द्वारा यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि  भारत में रहने वाले मुस्लिम ,आदिवासी ,वंचित वर्ग के लोग सुरक्षित नहीं है ।

सवाल उठता है कि आखिर कौन लोग है जो महामारी के इस दौर में इस तरह की घृणित कार्य को बढ़ावा दे रहे है । हिंदुस्तान एक लोकतांत्रिक देश है और सभी वर्गो के लोगो को समान अधिकार प्रदान किया गया है।भारत का संविधान किसी के साथ धर्म या जातिगत आधार पर भेद नहीं करता ।

भारत के प्रधान मंत्री जब किसी योजना की घोषणा करते है तो उसका लाभ 130 करोड़ आबादी को मिलता है ना कि किसी एक समुदाय जाति विशेष के लोगों को इन सब के बावजूद अक्सर देखने को मिलता है कि कुछ फिल्मी सितारे ,लेखक , तथाकथित समाजसेवी ,गैर सरकारी संगठनों के कार्यकर्ताओं कभी कश्मीर के नाम पर तो कभी रोहित बेमुला के नाम पर तो कभी अखलाक के नाम पर असहिष्णुता का राग अलापते है ।

अवार्ड वापसी गैंग दिल्ली दंगो में ताहिर हुसैन की भूमिका पर एक बार भी सवाल नहीं उठाता ना ही उसे पालघर में संतो कि हत्या पर रोना आता है और ना पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा हमारे सैनिकों की हत्या कर देने पर अपने विचार रखता है । कश्मीर में जब आतंकी मारे जाते है तब उसे मानवाधिकार का हनन नजर आता है ।

लेकिन सैनिक शहीद होते हैं तब यही मानवाधिकार की दुहाई देने वाले मौन धारण कर लेते है ।हिंसा से किसी का भला नहीं हुआ है अभी दिल्ली दंगो कि आग ठंडी नहीं हुई है जिसने कई मासूमों से उनके बाप का साया   छीन लिया । भारत में मुसलमानों को जितनी सुविधा है और जितने अधिकार मिले है वो किसी अन्य देश में नहीं है ।किसी के बहकावे में आकर यदि कोई हिंसा को बढ़ावा देता है तो वो अपना ही नुकसान करेगा ।

सर्वे भवन्तु सुखिन सर्वे भवन्तु निरामया के सिद्धांत पर आधारित हमारी संस्कृति रही है । देश आपसी तालमेल से ही आगे बढ़ेगा किसी के बहकावे में आकर अपने देश को बदनाम करना छोड़ दीजिए ।सरकार को चाहिए कि ऐसे कुत्सित विचार फैलाने वालों पर सख्ती से पेश आए ताकि देश की एकता और अखंडता सुरक्षित रहे ।

सबसे ज्यादा पड़ गई
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