शिक्षिका का हैरान करने वाला स्वैग: बच्चों से रास्ते पर लगवाया बेंच, उसपर चढ़कर पहुंची विद्यालय 

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 वायरल वीडियो के बाद मचा बवाल, शिक्षा विभाग ने मांगा जवाब

पानी से एलर्जी का दिया हवाला 

अररिया/अरुण कुमार 

एक शिक्षक के कंधों पर बच्चों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी होती है, लेकिन जब वही शिक्षक अपनी सुविधा के लिए मासूम बच्चों से ऐसा काम करवाने लगे जो उनके अधिकारों और सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर दे,शिक्षक के मानसिकता पर सवाल उठना लाजिमी है।

मामला अररिया जिले का है, जहां एक शिक्षिका का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि विद्यालय परिसर में जलजमाव होने के कारण शिक्षिका ने छोटे-छोटे बच्चों से बेंच उठवाकर पानी के बीच बिछवाई और फिर उन्हीं बेंचों पर चढ़कर खुद विद्यालय के अंदर पहुंचीं। हैरानी की बात यह है कि यह कोई एक बार की घटना नहीं थी, बल्कि बच्चों से यह काम कई बार कराया गया।

वायरल वीडियो में मासूम बच्चे बेंच उठाकर पानी में रखते नजर आ रहे हैं, जबकि शिक्षिका आराम से उन बेंचों पर कदम रखते हुए आगे बढ़ती दिख रही हैं। शिक्षिका की पहचान अफसाना परवीन, विशिष्ट शिक्षिका, प्राथमिक विद्यालय खजूरबाड़ी, वार्ड संख्या-10 के रूप में हुई है।

बताया जा रहा है कि किसी ग्रामीण ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो सामने आते ही लोगों में नाराजगी फैल गई और शिक्षिका के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई। अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को पढ़ने-लिखने के लिए स्कूल भेजते हैं, न कि शिक्षकों का सामान उठाने या उन्हें रास्ता बनाने के लिए।

हालांकि, पूरे मामले पर विद्यालय की प्रधान शिक्षिका नीलिमा पाठक ने सफाई देते हुए कहा कि अफसाना परवीन को एलर्जी की समस्या है और वे पानी में नहीं चल सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि विद्यालय परिसर में लंबे समय से जलजमाव की समस्या बनी हुई है, जिसकी शिकायत कई बार विभाग को भेजी गई, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ।

इधर, वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने शिक्षिका से पूरे मामले में 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।

अब सवाल यह है कि क्या बच्चों के कंधों पर बेंच का बोझ डालकर कोई शिक्षक अपनी जिम्मेदारी निभा सकता है, या फिर यह बच्चों के अधिकारों और शिक्षा की गरिमा के साथ खिलवाड़ है?

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