मो मुर्तुजा/ठाकुरगंज
पवित्र माह रमजानुल मुबारक के आखिरी शुक्रवार यानी अलविदा जुमा के अवसर पर ठाकुरगंज क्षेत्र की मस्जिदों में अकीदतमंदों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मुल्क में अमन-चैन, आपसी भाईचारा, शांति और तरक्की के लिए विशेष दुआओं के साथ अलविदा जुमा की नमाज अदा की गई।
इस्लामी कैलेंडर के अनुसार हर वर्ष की तरह इस साल भी माहे रमजान की शुरुआत 19 फरवरी से हुई, जो लगभग 30 दिनों तक चलने वाला है। इसी क्रम में शुक्रवार को रमजान का आखिरी जुमा अदा किया गया। सुबह से ही क्षेत्र की मस्जिदों में नमाजियों की चहल-पहल देखने को मिली।
मरकजी जामे मस्जिद के इमाम जहुर इस्लाम ने नमाजियों को संबोधित करते हुए कुरान और हदीस की शिक्षाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला तथा रमजान के महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि यह महीना इबादत, सब्र और नेकी का महीना है, जिसमें इंसान को अधिक से अधिक नेक काम करने चाहिए।
वहीं मक्का मस्जिद खानका घस्सीकुड़ा के इमाम मौलाना हबीबुर्रहमान नूरी ने कहा कि रमजान रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना है। इस महीने में बंदा अल्लाह के और करीब हो जाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अपने आसपास रहने वाले गरीब, यतीम और जरूरतमंद लोगों का खास ख्याल रखें, ताकि कोई भी गरीब भूखा न सोए। उन्होंने जकात के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि अपनी संपत्ति का ढाई प्रतिशत जकात निकालकर जरूरतमंदों में बांटना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह लोग रमजान के महीने में नमाज और इबादत की पाबंदी करते हैं, उसी तरह पूरे वर्ष मस्जिदों को आबाद रखना चाहिए। ईद के आने की खुशी जितनी होती है, उतना ही रमजान के जाने का गम भी होता है, क्योंकि आने वाला रमजान किसके नसीब में होगा, यह अल्लाह ही जानता है।
अलविदा जुमा की नमाज को लेकर मस्जिद कमिटियों की ओर से सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। वहीं सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आया।



























