बारिश ने मक्का किसानों की खुशियों पर फेरा पानी,किसान परेशान

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किशनगंज में बदले मौसम के मिजाज ने मक्का किसानों पर डाला संकट, बैंक कर्ज ने बढ़ाई परेशानी।

बारिश से फसल बर्बाद, शादी-ब्याह और कर्ज अदायगी के बीच फंसे किसान

किशनगंज/विजय कुमार साह

जिले में मानसून की अचानक दस्तक ने जहां आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, वहीं सबसे बड़ा झटका मक्का की खेती करने वाले किसानों को लगा है। खेतों से मक्का निकालकर थ्रेसर से दाने निकालने और सुखाने में जुटे किसान बारिश के चलते बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

मायानंद मंडल, बालेश्वर यादव, दयानंद ठाकुर, प्रेमलाल मंडल, हरिप्रसाद मंडल, अनिरुद्ध प्रसाद साह, बच्चन देव सिंह, जगदीश प्रसाद सिंह, पंचानंद ऋषिदेव, ब्रह्मदेव सिंह,बालेश्वर ऋषिदेव, रामनाथ सिंह दर्जनों किसानों की मेहनत पर बारिश ने पानी फेर दिया है। मक्का पूरी तरह सूख भी नहीं पाया था कि बारिश ने फसल को नुकसान पहुंचा दिया। भीगने से अनाज सड़ने की कगार पर है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान की आशंका सताने लगी है।

कर्ज का बोझ और बैंक का दबाव

किसानों ने बताया कि उन्होंने मक्के की खेती के लिए बैंकों से ऋण लिया था, लेकिन अब जब फसल चौपट हो रही है, तो बैंक लगातार ऋण वसूली के लिए दबाव बना रहे हैं। कई किसानों ने कहा कि उन्हें दिन-रात फोन कर बैंक वाले राशि जमा करने के लिए कह रहे हैं।

इस बीच कई किसान ऐसे भी हैं जिनके घर बेटे-बेटियों की शादी तय है, लेकिन बिगड़ी फसल और बैंक का दबाव उनकी खुशियों पर ग्रहण बनकर मंडरा रहा है। “फसल बर्बाद हो गई, शादी कैसे करें और बैंक की किस्त कहां से चुकाएं?”—ऐसी पीड़ा अब किसानों की जुबान पर है।

सरकार और जनप्रतिनिधियों से मांग

किसानों ने राज्य सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से बैंक कर्ज वसूली पर रोक लगाई जाए और बारिश से हुई क्षति का सर्वे कर मुआवजा दिया जाए। साथ ही जिन किसानों के घर विवाह आदि जैसे पारिवारिक कार्य हैं, उन्हें विशेष राहत दी जाए ताकि वे संकट की इस घड़ी से बाहर निकल सकें। यदि प्रशासन समय रहते किसानों की मदद नहीं करता, तो जिले में किसानों की आर्थिक स्थिति और भी बदतर हो सकती है।

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