श्यामानंद झा ने कहा- संकीर्णता से निकलकर विश्व बंधुत्व की भावना अपनाने की जरूरत
किशनगंज: शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर किशनगंज शहर के मोतीबाग वार्ड संख्या-07 में आयोजित नौ दिवसीय महागायत्री अनुष्ठान ‘वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः’ विश्व शांति की कामना के साथ यज्ञ-पूजन के बीच संपन्न हुआ। अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में आयोजित इस अनुष्ठान में बड़ी संख्या में परिजनों ने भाग लेकर राष्ट्र की समृद्धि, विश्व कल्याण और शांति की कामना की।
अनुष्ठान के समापन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक एवं वरिष्ठ प्रज्ञा पुत्र श्यामानंद झा ने कहा कि भारतीय वैदिक परंपरा में धर्मानुष्ठान केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ की भावना से किए जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्व शांति और मानव कल्याण के लिए समाज में प्रेम, सौहार्द, आत्मीयता और विश्व बंधुत्व की भावना को मजबूत करना आवश्यक है।
उन्होंने अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य एवं वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि पूरा विश्व हमारा परिवार है। ऐसे में संकीर्ण विचारधारा से ऊपर उठकर व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत की वैदिक संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना विश्व शांति की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
श्यामानंद झा ने कहा कि वर्तमान समय में समाज को सकारात्मक चेतना, आध्यात्मिक ऊर्जा और सत्प्रवृत्तियों के संवर्धन की आवश्यकता है। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पात्रता उपासना, प्रामाणिकता साधना और प्रखरता आराधना के माध्यम से विकसित करनी चाहिए। उन्होंने परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के संदेश ‘हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा; हम बदलेंगे, युग बदलेगा’ को जन-जन तक पहुंचाने और उसे अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक मनुष्य पर माता-पिता, गुरु, समाज और देवताओं के प्रति विभिन्न प्रकार के ऋण होते हैं। समय, श्रम, धन और सद्विचारों के माध्यम से इन दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को समझना तथा सदाचार के मार्ग पर चलना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
नवरात्र के अवसर पर यज्ञ एवं अन्य संस्कारों के समापन के बाद नारी सम्मान की परंपरा के तहत कुमारी कन्याओं को श्रद्धापूर्वक भोजन कराया गया और भावपूर्ण वातावरण में उनकी विदाई की गई। वैदिक परंपरा में कुमारी कन्याओं को देवी भगवती का स्वरूप मानकर पूजने की परंपरा रही है।
कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में रूपेश कुमार झा, पद्मा भारतीय, अंजू झा, शौर्य वर्धन, काव्या दत्ता, गौरी देवी सहित अन्य परिजनों की भूमिका सराहनीय रही। पूरे आयोजन के दौरान आध्यात्मिक एवं भक्तिमय वातावरण बना रहा।