मेनका कुमारी मौत मामले में विलंब से प्राथमिकी दर्ज करने एवं अनुसंधान में लापरवाही बरतने के आरोप में प्रभारी थानाध्यक्ष लाइन क्लोज,अनुसंधानकर्ता निलंबित

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किशनगंज/सागर चंद्रा

एसपी संतोष कुमार ने डुमरिया भट्टा निवासी मेनका मौत मामले में बिलंब से प्राथमिकी दर्ज करने के लिए प्रभारी थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर नेसार अहमद को तत्काल प्रभाव से लाईन क्लोज करते हुए सात दिनों के अन्दर स्पष्टीकरण मांगा है। जबकि मामले के अनुसंधानकर्ता एस आई सुधीर कुमार को कांड का अनुसंधान सार्थक रूप से करने के बजाय परिजनों के साथ दुर्व्यवहार करने और कांड के अनुसंधान में लापरवाही बरतने के लिए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।


बताते चलें कि एसपी ने गत 4 जून को उस स्थान का निरीक्षण किया था जहां से मेनका का शव बरामद किया गया था। रमजान नदी स्थित शिवगंगा छठ घाट का निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई थी की मेनका के लापता हो जाने के बाद जब परिजन शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे तो पुलिस पदाधिकारियों के द्वारा ससमय केस दर्ज न कर आवेदक का आवेदन बदलवाया गया था।

एसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीपीओ वन खुसरू सिराज को मामले की जांच कर जांच रिपोर्ट समर्पित करने का निर्देश दिया था। एसडीपीओ ने जांच में पाया कि आवेदक लक्षमण कुमार साह के आवेदन पर प्रभारी थानाध्यक्ष द्वारा विलंब से प्राथमिकी दर्ज की गयी थी। प्रभारी थानाध्यक्ष का यह कृत्य कर्तव्य के विपरीत पाया गया है, जो इनके कर्त्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, मनमानेपन, स्वेच्छाचारिता साथ-साथ एक अयोग्य पुलिस पदाधिकारी को परिलक्षित करता है।

जांच रिपोर्ट के आधार पर एसपी ने प्रभारी थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर नेसार अहमद को रविवार से लाईन क्लोज कर उन्हें 07 दिनों के अन्दर विभागीय कार्यवाही के विरूद्ध स्पष्टीकरण की मांग की है।
जबकि जांच में यह भी पाया गया कि मामले के अनुसंधानकर्ता एस आई सुधीर कुशवाहा द्वारा कांड का अनुसंधान सार्थक रूप से करने के बजाए परिजनों के साथ दुर्व्यवहार किया गया था। एसडीपीओ ने जांच में पाया कि मृतिका के परिजन द्वारा गुमशुदगी के संबंध में दर्ज कराये गये किशनगंज थाना कांड संख्या-574/26 के अनुसंधानकर्ता के द्वारा किशोरी की बरामदगी हेतु सार्थक प्रयास करने के बजाए अपने कर्तव्य के विपरीत जाकर वादी के साथ दुर्व्यवहार करते हुए कांड के अनुसंधान एवं घटनास्थल का निरीक्षण के नाम पर केवल खानापूर्ति किया गया था।

घटनास्थल पर मिले मृतिका के बाल के क्लचर को समय पर बरामद कर जप्त नहीं किया गया था, जो अनुसंधानकर्ता के कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, मनमानेपन, स्वेच्छाचारिता, कांड के अनुसंधान में बरती गई लापरवाही के साथ एक अयोग्य पुलिस पदाधिकारी को परिलक्षित करता है। एसपी ने एसडीपीओ के द्वारा समर्पित जांच प्रतिवेदन के आधार पर एस आई सुधीर कुशवाहा को तत्काल प्रभाव (रविवार) से सामान्य जीवन यापन भत्ता पर निलंबित किया गया है तथा 07 दिनों के अन्दर विभागीय कार्यवाही के विरूद्ध स्पष्टीकरण की मांग की गयी है।

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