अररिया /अरुण कुमार
अररिया जिले के नरपतगंज प्रखंड अंतर्गत मानिकपुर पंचायत और गोखलापुर गांव इन दिनों गहरे शोक में डूबे हुए हैं। मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित एक पटाखा फैक्ट्री में 14 मई को हुए भीषण अग्निकांड ने कई गरीब परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस दर्दनाक हादसे में अब तक पांच मजदूरों की मौत की खबर सामने आई है, जबकि एक दर्जन से अधिक मजदूर घायल बताए जा रहे हैं। कई परिवार अब भी अपने लापता बेटों की तलाश में टकटकी लगाए बैठे हैं। गांव में हर तरफ चीख-पुकार, मातम और सन्नाटा पसरा हुआ है।
बताया जाता है कि नरपतगंज प्रखंड के मानिकपुर पंचायत के अलग-अलग गांवों से 11 मजदूर करीब छह माह पूर्व रोजी-रोटी की तलाश में इंदौर गए थे। वहां वे एक पटाखा फैक्ट्री में मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पाल रहे थे। लेकिन 14 मई को फैक्ट्री में अचानक लगी भीषण आग ने कई परिवारों को बर्बाद कर दिया।
हादसे में मानिकपुर पंचायत के भवानीपुर गांव निवासी 25 वर्षीय धीरज कुमार की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि गांव के ही 24 वर्षीय बबलू कुमार अब भी लापता हैं।
परिजन लगातार उनकी तलाश में जुटे हैं, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। घर में मां-बाप और बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बहनें भाई को याद कर बार-बार बेहोश हो जा रही हैं।
इसी हादसे में गोखलापुर गांव निवासी 18 वर्षीय अमन कुमार, पिता मनोज पासवान, की भी मौत हो गई। शनिवार देर शाम जब अमन का शव गांव पहुंचा तो पूरा गांव गम में डूब गया। महिलाओं की चीख-पुकार और स्वजनों के विलाप से माहौल बेहद मार्मिक हो उठा। अमन तीन भाइयों में सबसे बड़ा था और परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद भी। उसकी कमाई से ही घर का खर्च चलता था।
वहीं भवानीपुर निवासी धीरज कुमार भी दो भाइयों में छोटे थे। वे मजदूरी कर अपने बूढ़े माता-पिता का सहारा बने हुए थे। दोनों युवक अविवाहित थे और परिवार के सपनों को पूरा करने के लिए घर से दूर मेहनत कर रहे थे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
हादसे में भवानीपुर गांव के 26 वर्षीय अभिषेक कुमार, 20 वर्षीय पिंटू कुमार, 25 वर्षीय अजय कुमार, 25 वर्षीय लालटू कुमार और 50 वर्षीय रामवृक्ष पासवान गंभीर रूप से झुलस गए हैं। सभी का इलाज इंदौर के अस्पतालों में चल रहा है। बताया जा रहा है कि वे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
वहीं इस अग्निकांड में सुरक्षित बचे नीरज कुमार, अंजेश कुमार, अमित कुमार, अरविंद पासवान तथा नेपाल के देवानगंज निवासी दिनेश पासवान किसी तरह अपने घर लौट आए। जैसे ही वे गांव पहुंचे, परिजनों की आंखों से आंसू छलक पड़े। किसी मां ने बेटे को गले लगाकर रोया तो किसी ने भगवान का शुक्रिया अदा किया।
गांव की स्थिति इतनी दर्दनाक है कि मृतक और लापता मजदूरों के कई घरों में पिछले तीन दिनों से चूल्हा तक नहीं जला है। घर के कमाने वाले बेटे के चले जाने के बाद परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
स्वजन बार-बार यही कह रहे हैं — “अब घर कैसे चलेगा?”
मानिकपुर पंचायत के पूर्व पंचायत समिति सदस्य मो. इब्राहिम ने बताया कि मृतक धीरज उनके घर के बगल में रहता था। हाल ही में आंधी में उसका घर क्षतिग्रस्त हो गया था। परिवार को उम्मीद थी कि बेटा बाहर कमाकर नया घर बनाएगा, लेकिन उससे पहले ही यह हादसा हो गया। उन्होंने कहा कि पूरा परिवार अंदर से टूट चुका है।
घटना के बाद ग्रामीण लगातार पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधा रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मृतक मजदूरों के परिजनों को उचित मुआवजा देने, घायलों के बेहतर इलाज की व्यवस्था करने और लापता मजदूरों की तलाश तेज करने की मांग की है।अधिकारी ममता कुमारी ने बताया कि मृतक मजदूरों के घर पहुंचकर घटना की विस्तृत जानकारी ली गई है। कागजी प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को भेज दी गई है। आदेश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल मानिकपुर और गोखलापुर गांव में हर आंख नम है। लोग अब भी लापता मजदूरों के सकुशल मिलने की दुआ कर रहे हैं।






















