अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर राहत संस्था और SSB का संयुक्त सेमिनार, महिलाओं के अधिकार और सशक्तिकरण पर हुई चर्चा

SHARE:


किशनगंज। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के शुभ अवसर पर राहत संस्था आई पार्टनर किशनगंज और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) 12वीं बटालियन फैरिंगोला के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता व्यवहार न्यायालय की अपर मुख्य दंडाधिकारी श्रीमती शारदा ने की।


कार्यक्रम की शुरुआत राहत संस्था की सचिव डॉ. फरजाना बेगम द्वारा सभी अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। इस अवसर पर डॉ. लिपि मोदी शाह, समाजसेवी, एसएसबी की मैस स्टाफ श्रीमती शिल्पी मिश्रा, श्रीमती मंजू  सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। सभी अतिथियों का स्वागत शॉल, पुष्पगुच्छ और मोमेंटो देकर सम्मानित कर किया गया।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. फरजाना बेगम ने कहा कि महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। शिक्षा, रोजगार, प्रशासन और निजी क्षेत्रों में महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि समाज में आज भी पितृसत्तात्मक सोच का प्रभाव देखने को मिलता है, लेकिन महिलाओं की जागरूकता और संघर्ष से परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं।

उन्होंने राहत संस्था के 25 वर्षों के सफर पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संस्था किशनगंज सहित बिहार के 12 जिलों में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।
एसएसबी की श्रीमती मंजू साहिब ने अपने वक्तव्य में कहा कि सीमा पर तैनात जवानों की सफलता के पीछे उनके परिवार की महिलाओं का बड़ा योगदान होता है।

जब महिलाएं घर की जिम्मेदारियों को मजबूती से संभालती हैं, तभी जवान निश्चिंत होकर देश की सुरक्षा में अपना कर्तव्य निभा पाते हैं।
वहीं श्रीमती शिल्पी मिश्रा ने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। महिलाओं के अधिकारों की आवाज सबसे पहले 1909 में अमेरिका में उठी थी।

पहले महिलाओं और पुरुषों को समान कार्य के बावजूद अलग-अलग मजदूरी दी जाती थी, लेकिन अब समान कार्य के लिए समान वेतन की व्यवस्था ने समाज में सकारात्मक बदलाव लाया है।
राहत संस्था के परियोजना समन्वयक मिराज दानिश ने संस्था के कार्यों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि राहत संस्था मुख्य रूप से बाल श्रम, मानव तस्करी और बाल विवाह जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों पर काम कर रही है।

उन्होंने किशनगंज जिले की एक बाल विवाह पीड़िता की कहानी साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार कम उम्र में विवाह के बाद वह मानव तस्करी का शिकार हो गई थी, जिसे संस्था के प्रयासों से बचाया गया और दोषियों को कानून के दायरे में लाया गया। उन्होंने बताया कि बाल विवाह न केवल सामाजिक बुराई है बल्कि कानूनन अपराध भी है, जिसमें एक लाख रुपये तक जुर्माना और दो साल तक की सजा का प्रावधान है।


डॉ. लिपि मोदी शाह ने राहत संस्था की सराहना करते हुए कहा कि महिला दिवस केवल 8 मार्च तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई पूरे वर्ष चलनी चाहिए।


इस दौरान डॉ. फरजाना बेगम ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संबंधित कानून की जानकारी दी और एक लघु फिल्म के माध्यम से महिलाओं को जागरूक किया कि वे किस प्रकार अपनी शिकायत समिति के सामने रख सकती हैं और न्याय प्राप्त कर सकती हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही एसीजेएम श्रीमती शारदा ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा के लिए सरकार, समाज और न्याय व्यवस्था को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने इस दिशा में राहत संस्था के प्रयासों की सराहना की।


इस मौके पर राहत संस्था की ओर से मीडिया प्रतिनिधियों को पुष्पगुच्छ और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। साथ ही एसएसबी की महिला कांस्टेबलों को भी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सम्मानित किया गया।


कार्यक्रम के दौरान राहत संस्था की सचिव डॉ. फरजाना बेगम ने एसएसबी के कमांडेंट पवन मिश्रा और सहायक कमांडेंट विनय को शॉल, मोमेंटो और पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया। वहीं एसएसबी की ओर से भी डॉ. फरजाना बेगम, परियोजना समन्वयक मिराज दानिश और डॉ. लिपि मोदी शाह को पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया।


अंत में एसएसबी के कमांडेंट पवन मिश्रा ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए राहत संस्था के पूरे परिवार, जवानों, मीडिया प्रतिनिधियों और उपस्थित सभी लोगों का आभार व्यक्त किया और अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।

Leave a comment

सबसे ज्यादा पड़ गई