मकर संक्रांति का त्यौहार आस्था और उमंग के साथ मनाया गया

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किशनगंज /रणविजय

बुधवार को किशनगंज में मकर संक्रांति पर्व धूमधाम से मनाया. इस दौरान लोगों ने सबसे पहले अहले सुबह नदी सरोवरों में आस्था की डुबकी लगाकर मंदिरों में पूजा पाठ की, तत्पश्चात दही चूरा गुड़ तिलकूट पुआ आदि का प्रसाद ग्रहण किया. लोगों ने क्षेत्र में बहने वाली नदियां महानंदा, मेंची, बूढ़ी कनकई में आस्था की डुबकी लगाकर पावन दिन की शुरुआत की.

धार्मिक अनुष्ठान के साथ ही लोग दान पुण्य का भी कार्य किए. मकर संक्रांति के साथ ही एकादशी का भी पर्व लोगों ने एक साथ मनाया. एकदशी होने के कारण अनेकों घरों में महिलाओं ने व्रत रखकर पावन को संपन्न किया है. गौरतलब है कि मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने जिसे सूर्य का उत्तरायण होना कहा जाता है तब मनाया जाता है.

इस दिन से मौसम में गर्माहट की शुरुआत हो जाती है. इस पावन दिन दही चूरा गुड़ और तिलकुट को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की सदियों पुरानी परंपरा अध्यात्म और विज्ञान दोनों पर आधारित है. गौरतलब है कि इस समय धान की नई फसल से चूरा तैयार किया जाता है जिसे पहले भगवान को अर्पित किया जाता है.

चूरा चंद्रमा का तो दही शुक्र और गुड़ तिलकुट सूर्य का प्रतीक है, जो स्वास्थ्य के लिए उत्तम माना जाता है, जिसे खाकर सकारात्मक ऊर्जा एवम सुख शांति समृद्धि की प्राप्ति होती है. यही कारण है कि मकर संक्रांति के दिन लोग दही चूरा गुड़ तिलकुट को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं.

इस दिन दान पुण्य का भी विशेष महत्व है शास्त्रों के मुताबिक इस दिन दान पुण्य और खिचड़ी प्रसाद वितरण करने वालों को ईश्वर की विशेष कृपा का लाभ प्राप्त होता है. मकर संक्रांति के दिन नगर बाजार सहित विभिन्न हाट बाजारों में रौनक छाई रही.

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