किशनगंज /प्रतिनिधि
डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय, अर्राबारी के आदर्श बागवानी केंद्र : चाय द्वारा “चाय की वैज्ञानिक खेती” विषय पर 3 दिवसीय जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन गुरुवार को महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. के. सतनारायणन द्वारा किया गया। उद्घाटन सत्र की शुरुआत में कोर्स डायरेक्टर डॉ. विवेक सौरव ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की तीन दिवसीय रूपरेखा प्रस्तुत की।
प्राचार्य डॉ. के. सतनारायणन ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार में चाय की खेती के लिए अत्यंत अनुकूल परिस्थितियाँ उपलब्ध हैं और राज्य सरकार इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पहल कर रही है। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने तथा चाय की खेती के क्षेत्र में विस्तार हेतु प्रेरित किया।
कार्यक्रम में ब्लॉक हॉर्टिकल्चर ऑफीसर, ठाकुरगंज, श्री शॉनी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने चाय की खेती के महत्व, वर्तमान चुनौतियों एवं उनके वैज्ञानिक समाधान पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ठाकुरगंज में चाय उत्पादन की अपार संभावनाएँ हैं, परंतु किसानों को पौध प्रबंधन, कीट-रोग नियंत्रण, विपणन एवं वैज्ञानिक मार्गदर्शन की निरंतर आवश्यकता रहती है।
उद्यानिकी अनुसंधान संस्थान के प्रभारी अधिकारी डॉ. जितेन्द्र प्रताप सिंह ने किसानों को चाय की वैज्ञानिक तकनीकों, उन्नत विधियों तथा पौध प्रबंधन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक पद्धति से खेती अपनाने पर किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे। चाय की खेती से किसानों को आर्थिक लाभ, रोजगार के अवसर, और आत्मनिर्भरता मिलती है।
बिहार की अनुकूल जलवायु और मिट्टी चाय की खेती के लिए उपयुक्त है, जिससे उत्पादन बढ़ सकता है। राज्य सरकार भी चाय की खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है। कार्यक्रम में सहायक नियंत्रक, श्री राम ज्ञान महतो भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के वैज्ञानिक—डॉ. लव कुमार, डॉ. कृष्णा डी.के., डॉ. सागरिका भौमिक, डॉ. केविन क्रिस्टोफर एवं डॉ. नागार्जुन—उपस्थित रहे। विशेषज्ञों ने चाय की उन्नत खेती से संबंधित विषयों जैसे पौध चयन, पोषण प्रबंधन, सिंचाई तकनीक, प्रूनिंग, एकीकृत कीट-रोग प्रबंधन, मशीनीकरण और फील्ड संचालन पर व्यापक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। कार्यक्रम में शामिल किसानों ने चाय की खेती के दौरान आने वाली विभिन्न समस्याओं एवं अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने वैज्ञानिकों द्वारा दिए गए उपयोगी मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी तकनीकी सहयोग जारी रखने का अनुरोध किया।




























