किशनगंज में चार रातों की तबाही, खेत बने उजाड़ मैदान

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कर्ज में डूबे किसान, भूख और बेबसी का गहराता संकट
निरंजन राय बने सहारा, सरकार से राहत के लिए उठाई बुलंद आवाज

पोठिया/किशनगंज/राज कुमार

: पोठिया प्रखंड में मार्च की चार रातें किसानों के लिए कहर बनकर आई। 15, 16, 20 और 27 मार्च को आई तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि ने ऐसा प्रहार किया कि खेतों की पूरी तस्वीर बदल गई। मक्का, गेहूं और अन्य फसलें देखते ही देखते जमीन पर बिछ गईं। जहां कुछ दिन पहले तक लहलहाती फसलें थीं, वहां अब सिर्फ बर्बादी का मंजर है।


इस भीषण स्थिति में जिला परिषद क्षेत्र संख्या 14 के सदस्य निरंजन राय किसानों की आवाज बनकर उभरे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, जिला पदाधिकारी और कृषि विभाग को पत्र भेजकर पूरे मामले को गंभीरता से उठाया है। उनके पत्र में न केवल हालात का स्पष्ट वर्णन है, बल्कि किसानों के लिए ठोस राहत की मांग भी की गई है। क्षेत्र में उनकी इस पहल की खुलकर सराहना हो रही है और लोग उन्हें किसानों का प्रतिनिधि बता रहे हैं।


पोठिया के फाला, मिर्जापुर, डूबानोची, कुशियारी, गोरखाल, बुढ़नई और कस्बा कलियागंज समेत कई पंचायतों में तबाही का असर साफ दिख रहा है। हजारों एकड़ में लगी फसलें नष्ट हो गईं। खेतों में खड़ी फसलें गिरकर सड़ने लगी हैं। किसान अपने खेतों को देखकर मायूस खड़े हैं।


फाला पंचायत के किसान अशोक कुमार सिंह की आवाज में बेबसी साफ झलकती है। उन्होंने कर्ज लेकर मक्का की खेती की थी। अब पूरी फसल बर्बाद हो चुकी है। वे कहते हैं कि घर चलाना मुश्किल हो गया है और कर्ज चुकाने की कोई राह नहीं दिख रही। मिर्जापुर के जयंत सिंह बताते हैं कि कई बीघा में लगी फसल एक झटके में खत्म हो गई। अब बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्च की चिंता उन्हें हर पल परेशान कर रही है। डूबानोची के अब्दुल रहीम कहते हैं कि महीनों की मेहनत एक रात में मिट गई और अब सरकार की मदद ही एकमात्र सहारा है।


निरंजन राय ने अपने पत्र में स्पष्ट कहा है कि यह आपदा सिर्फ फसलों की बर्बादी तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों के जीवन पर गहरा असर डाल रही है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत सर्वे कराया जाए ताकि हर किसान के नुकसान का सही आकलन हो सके। उन्होंने यह भी कहा है कि मुआवजा राशि प्रति एकड़ के हिसाब से तय कर सीधे किसानों के खाते में भेजी जाए, ताकि राहत में देरी न हो।


उन्होंने आगे आग्रह किया है कि जिन किसानों ने खेती के लिए ऋण लिया है, उन्हें तत्काल राहत दी जाए। कर्ज माफी या कम से कम कर्ज स्थगन का निर्णय लिया जाए, ताकि किसान दोहरी मार से बच सकें। इसके साथ ही अगली फसल के लिए मुफ्त बीज और खाद उपलब्ध कराने की बात भी उन्होंने जोर देकर उठाई है। निरंजन राय ने सरकार से यह भी अपील की है कि पूरे प्रभावित क्षेत्र को आपदा प्रभावित घोषित कर विशेष पैकेज दिया जाए, ताकि किसानों को संपूर्ण राहत मिल सके।


निरंजन राय ने कहा कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। किसान उत्पादन करने में असमर्थ हो जाएंगे और इसका असर पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मुश्किल घड़ी में निरंजन राय ने जिस तरह सक्रियता दिखाई है, वह काबिले तारीफ है। उन्होंने न केवल समस्या को समझा, बल्कि उसे मजबूती से सरकार के सामने रखा।


अब किसानों की उम्मीद प्रशासन सरकार से है। सूखे खेतों और टूटे सपनों के बीच एक ही सवाल गूंज रहा है कि क्या उन्हें समय पर राहत मिलेगी या वे यूं ही संकट में जूझते रहेंगे।वही मिली जानकारी के मुताबिक देर शाम कृषि मंत्री राम कृपाल यादव के द्वारा किसानों को मुआवजा देने की घोषणा की गई है ।जिसके बाद किसानों में एक उम्मीद की किरण जगी है

सबसे ज्यादा पड़ गई
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