टेढ़ागाछ (किशनगंज) विजय कुमार साह
प्रखंड क्षेत्र के चिल्हनियां पंचायत अंतर्गत कुंवारी गांव में आयोजित विश्वस्तरीय संतमत सत्संग के 16वें वार्षिक जिला महा अधिवेशन का समापन मंगलवार को भक्तिमय वातावरण में हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में सत्संगियों और श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आध्यात्मिक प्रवचनों का लाभ उठाया।

पूरे आयोजन स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का माहौल देखने को मिला। सत्संग सभा को संबोधित करते हुए संत सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज के शिष्य स्वामी व्यासानंद जी महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। उन्होंने कहा, “साधन धाम मोक्ष कर द्वारा” — अर्थात यह मानव शरीर ही साधना का सर्वोत्तम माध्यम है, जिसके द्वारा मोक्ष की प्राप्ति संभव है।
उन्होंने बताया कि सत्संग और भजन के बिना मनुष्य और दानव में कोई विशेष अंतर नहीं रह जाता। स्वामी व्यासानंद जी महाराज ने अपने प्रवचन में सत्संगियों को सदाचार का पालन करने और सतगुरु का नियमित ध्यान करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि नियमित ध्यान-योग से आत्मिक शक्ति का विकास होता है और व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। सतगुरु की कृपा दृष्टि मात्र से जीवों का कल्याण संभव है, इसलिए हर व्यक्ति को सच्चे गुरु की शरण में जाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में नैतिक मूल्यों को अपनाना चाहिए तथा पांच प्रमुख पापों से दूर रहना चाहिए। जो व्यक्ति इन पापों का त्याग करता है, वही सच्चा सत्संगी और गुरु भक्त कहलाने योग्य होता है। उन्होंने इन्द्रियों को वश में रखने के उपाय भी बताए और संयमित जीवन जीने पर बल दिया। इस अवसर पर विभिन्न संत-महात्माओं एवं विद्वानों द्वारा भी प्रवचन और भजन प्रस्तुत किए गए, जिससे श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
हरिद्वार से पधारे स्वामी व्यासानंद जी महाराज के साथ-साथ सैदाबाद से आए स्वामी नारायण बाबा सहित अन्य संतों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया। सत्संग स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे पूरा पंडाल खचाखच भरा रहा।
आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए व्यापक और सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई थी, जिसमें बैठने, पेयजल एवं अन्य सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया। स्थानीय ग्रामीणों और सत्संग प्रेमियों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।सांध्यकालीन सत्संग और भजन-कीर्तन के साथ दो दिवसीय यह संतमत सत्संग अधिवेशन शांतिपूर्ण और भक्तिमय वातावरण में संपन्न हो गया। इस आयोजन ने क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने के साथ-साथ सामाजिक एकता और नैतिक मूल्यों के प्रति लोगों को प्रेरित किया।
























