गंगा किनारे और गंगा की कोख मे बसे लोगों की आजीविका, आवास और अस्तित्व पर मंथन

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मनिहारी /कटिहार – पावन गंगातट पर बसे पावन नगरी मनिहारी की धरा पर दिल्ली से आये पर्यावरण शवाहिक सिद्दीकी एवं साभवी ठाकुर ने गंगाघाटी मंच बिहार के संयोजक भगवान जी पाठक, अभिलाषा परिवार के सचिव राजेश कुमार सिंह की अगुवाई में नेशनल पब्लिक स्कूल मनिहारी के प्रांगण में संबंधित हितधारकों,सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की।

नदी घाटी मंच, बिहार एवं अभिलाषा परिवार, कटिहार द्वारा गंगा किनारे और गंगा की कोख में बसे लोगों की आजीविका, आवास और अस्तित्व से संबन्धित मुद्दों पर व्यापक चर्चा हेतु पहली बार आयोजित “गंगा संवाद” में जिले भर के शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों, अधिवक्ताओं से चर्चा के उपरान्त स्थानीय परिस्थितियों से अवगत होने तथा गंगा किनारे एवं गंगा के कोख की परिस्थितियों से रुबरु होने हेतु दिल्ली से आए उच्च न्यायालय के पर्यावरण वकील शवाहिक सिद्दीकी तथा साभवी ठाकुर, नदियों के सवाल पर काम करने वाले पर्यावरणविद् भगवानजी पाठक तथा अभिलाषा परिवार के सचिव राजेश कुमार सिंह की टीम नेशनल पब्लिक स्कूल मनिहारी परिसर में सामाजिक कार्यकर्ता डॉ० ओम प्रकाश पाण्डेय के संयोजकत्व में सभी हितधारकों से परिचर्चा की।

परिचर्चा में मनिहारी महाविद्यालय, मनिहारी के सेवानिवृत प्राध्यापक प्रो० वीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि गंगा के कटाव से इसके किनारे तथा इसके कोख में बसे लोगों की आजीविका प्रभावित होती है | उनके परिवार ने भी कटाव का दंश झेला है उनकी पुस्तैनी जमीन गंगासिकस्त हो गई जिसे आजादी के पूर्व उनके पूर्वजों ने रजिस्ट्री केवाला से खरीदा था; गंगबरार होने पर कागज़ रहने के बावजूद जमीन पर वे दखलाकार नहीं हो सके।

सामाजिक कार्यकर्ता एवं तीर्थ पुरोहित रमेश मिश्रा ने मनिहारी गंगा घाट पर पूजन सामग्री एवं अन्य अवसर पर दूकानदारों की चुनौतियों की जानकारी दी। स्वास्थ्य क्षेत्र में उत्प्रेरक आशीष कुमार सिन्हा ने इस क्षेत्र में नदी किनारे के वासियों, कटाव से विस्थापितों तथा नदी की कोख में बसे लोगों की स्वाथ्य सुविधाओं तक पहुंच और उनकी स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में चर्चा की | स्वयं गंगा कटाव से विस्थापित होकर मनिहारी में निवास कर रहे बिरेन्द्र कुमार झा उर्फ बिल्टु झा ने गंगा किनारे और गंगा की कोख में बसे लोगों के अस्तित्व संबन्धि समस्याओं को बताया|

सामाजिक कार्यकर्ता राजेश कुमार पोद्दार ने इस क्षेत्र के महिलाओं की स्वास्थ्य, शिक्षा एवं आजीविका संबन्धि समस्याओं को रखा। संजीव कुमार राय तथा दिनेश कुमार राय ने मछुआरों की समस्या को बताया | डॉ० ओम प्रकाश पाण्डेय ने मछुआरों, नदी किनारे के किसानों, महिलाओं, प्रवासी समुदायों तथा नदी-कटाव और गाद जमाव के प्रभाव से जुड़े विषयों को तथ्यपूर्ण ढंग से रखा

| टीम के सदस्यों ने प्रभावित लोगों की आजीविका, अधिकारों और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों आदि विभिन्न मुद्दों, गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना बेसिन के नदी-तटीय समुदायों के अनुभवों, आजीविका संबंधी चुनौतियों और स्थानीय आवश्यकताओं को नदी शासन और विकास नीतियों में अधिक समावेशी ढंग से शामिल किए जाने, विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय समुदायों ने अंतर्राष्ट्रीय जल कानून, समावेशी नदी शासन और सामुदायिक भागीदारी के आधार पर नदी-पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण, पुनर्वास नीतियों तथा प्रभावित समुदायों के लिए प्रभावी संस्थागत सहयोग की आवश्यकता पर लोगों की राय ली।

स्थानीय मुद्दों पर हुई चर्चा को उनके समाधान के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार करने में सहायक बताया। विशेष रूप से मछुआरा समुदाय से जुड़े नदी प्रदूषण, गाद भराव और मछलियों की घटती संख्या जैसी समस्याओं पर गंभीर प्रयास की आवश्यकता को स्वीकारा। टीम ने गंगा किनारे का भ्रमणकर नदी से जुड़े विभिन्न अवयवों का अवलोकन और चर्चा की |

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