कर्ज लेकर दुकानें खड़ी कर रहे पीड़ित
कुरसेला /कटिहार – भीषण अगलगी के बाद वीरान पड़े नया हाट में पांचवें दिन फिर से हलचल दिखने को मिली। जहां कुछ दिन पहले तक सिर्फ राख, धुआं और सन्नाटा था। वहीं अब अस्थायी दुकानों के खुलने से बाजार में धीरे-धीरे चहल-पहल लौटती नजर आ रही है।शुक्रवार को कई पीड़ित दुकानदारों ने टीन-तंबू और बांस-बल्ली के सहारे अपनी अस्थायी दुकानें खड़ी करने के प्रयास में जुटे थे। हालांकि यह शुरुआत मजबूरी में है, क्योंकि अब तक उन्हें सरकारी स्तर पर कोई ठोस राहत नहीं मिल सकी है।
पीड़ित दुकानदार मूर्शिद आलम, सुनील साह और अरविंद जायसवाल ने बताया कि अगलगी की घटना के बाद जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने आश्वासन तो दिया। लेकिन अब तक किसी प्रकार की आर्थिक सहायता उनके हाथ नहीं लगी है। दुकानदारों ने कहा कि घर चलाने और परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए उन्हें दोबारा कर्ज लेने की मजबूरी है।
अगर दुकान नहीं खोलेंगे तो परिवार भूखा रहेगा, इसलिए फिर से उधार लेकर दुकान खड़ी कर रहे हैं, हाट परिसर में जले मलबे को हटाने का काम भी अब दुकानदार खुद ही कर रहे हैं। हाथों में फावड़ा और टोकरी लेकर व्यापारी अपनी जली दुकानों के अवशेष साफ करते दिखे। प्रशासनिक स्तर पर सफाई की प्रक्रिया नहीं होने के कारण दुकानदारों ने खुद पहल की है।
कुछ अस्थायी दुकानों के खुलने से ग्राहकों की आवाजाही भी बढ़ने लगी है। आसपास के ग्रामीण रोजमर्रा की जरूरतों के सामान के लिए हाट पहुंचने लगे हैं। हालांकि अभी पूरी रौनक लौटने में समय लगेगा। लेकिन पांचवें दिन की हलचल ने उम्मीद की किरण जरूर जगा दी है। अगलगी की इस त्रासदी के बाद नया हाट फिर से खड़ा होने की कोशिश कर रहा है। लेकिन पीड़ितों की निगाहें अब भी प्रशासन और सरकार की ओर टिकी हैं। ताकि उन्हें मुआवजा और स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था मिल सके।




























