किशनगंज/प्रतिनिधि
निगरानी विभाग की पंद्रह सदस्यीय टीम गिरफ्तार प्रधान लिपिक अशोक चौधरी और परिचारी सरोज कुमार को अपने साथ लेकर रवाना हो गई।टीम के द्वारा गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ भी की गई थी। पूछताछ में कई अहम खुलासे भी हुए है।जिसमें यह बात भी सामने आई है की यह खेल कितने दिनों से चल रहा था।हालांकि निगरानी टीम के द्वारा की गई पूछताछ को गुप्त रखा गया है।
वहीं निगरानी विभाग के द्वारा खनन कार्यालय के दो कर्मी के विरुद्ध की गई कार्रवाई के बाद दूसरे दिन बुधवार को खनन कार्यालय का माहौल कुछ अलग रहा। विभाग में जो कर्मचारी कार्यरत है वे समय पर अपने कार्यालय पहुंचे थे।लेकिन हर किसी के चेहरे के भाव अन्य दिनों की अपेक्षा कुछ अलग थे।हर कोई निगरानी विभाग की कार्रवाई की चर्चा दबी जुबान से कर रहा था की कैसे अचानक से ये कार्रवाई हो गई।कितने दिनों से कार्रवाई की योजना बनाई जा रही थी।
परिसर के आसपास के दुकानों में भी निगरानी की कार्रवाई को लेकर चर्चा होती रही। दुकानों के आसपास लोगों का जमावड़ा था।कार्रवाई से अंचल परिसर में घूसखोरी करने वालों के बीच हड़कम्प मच गया है। हालांकि कुछ लोग काम के लिए कार्यालय आ रहे थे।बताया जाता है की बेतिया निवासी गिरफ्तार प्रधान लिपिक अशोक कुमार चौधरी ने पांच माह पहले ही किशनगंज खनन कार्यालय में योगदान दिया था। पटना फुलवारी शरीफ निवासी परिचारी सरोज कुमार पिछले चार वर्षों से कार्यरत थे।
यहां बता दें किनिगरानी विभाग की टीम ने मंगलवार को खनन कार्यालय के प्रधान लिपिक अशोक कुमार चौधरी को 8 हजार रुपए व खनन कार्यालय के परिचारी सरोज कुमार को 7 हजार रुपए घुस लेते हुए गिरफ्तार किया था।पहले विभाग के परिचारी को डुमरिया गर्ल्स हाई स्कूल के पास से व विभाग के प्रधान लिपिक को खनन कार्यालय के पास एक चाय की दुकान में गिरफ्तार किया गया था।
पीड़ित चकला निवासी हबीब आलम ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में शिकायत दर्ज करवाई थी।परिवाद दर्ज किए जाने के बाद मामले का सत्यापन करवाया गया था।सत्यापन के बाद निगरानी थाना कांड संख्या 20/26 के तहत 16 फरवरी 2026 को मामला दर्ज करवाया गया था। केस के अनुसंधानकर्ता निगरानी डीएसपी आशिफ इकबाल मेहदी बनाए गए थे।

























