श्रीरामपुर (पश्चिम बंगाल) पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक दुर्गा पूजा और ऐतिहासिक परंपराओं को संरक्षित करने के उद्देश्य से ‘बी ए फोटूरियन टूर एंड ट्रेवल्स ऑपरेटर’ की ओर से ‘या देवी सर्वभूतेषु हेरिटेज फोटूर जर्नी’ के छठे संस्करण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विरासत संरक्षण में योगदान देने वाले लोगों और संस्थाओं को सम्मानित किया गया।
‘बी ए फोटूरियन’ के संस्थापक अभिषेक भट्टाचार्य की परिकल्पना पर आधारित इस पहल का उद्देश्य फोटोग्राफी और पर्यटन के माध्यम से बंगाल की सांस्कृतिक धरोहर को सामने लाना और आने वाली पीढ़ियों तक उसकी पहचान पहुंचाना है।
कार्यक्रम में श्रीरामपुर राजबाड़ी को उसकी समृद्ध पारिवारिक विरासत और पारंपरिक दुर्गा पूजा के लिए सम्मानित किया गया। राजबाड़ी के शिबाशीष गोस्वामी ने मैडम सोमलग्ना के साथ प्रतिभागियों को अपने परिवार की दुर्गा पूजा के इतिहास और उससे जुड़ी परंपराओं की जानकारी दी। इस अवसर पर सांसद कल्याण बनर्जी की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम के मेजबान श्रीरामपुर श्री श्री सारदा रामकृष्ण अनुध्यान केंद्र को सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और आयोजन में सहयोग के लिए ‘या देवी सर्वभूतेषु हेरिटेज फोटूर सम्मान’ प्रदान किया गया। केंद्र के पुरोहित सौजीत रॉयचौधरी को धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के संरक्षण में योगदान के लिए सर्वश्रेष्ठ पुरोहित सम्मान से नवाजा गया।
इस अवसर पर केंद्र की समिति के सदस्यों को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया। इनमें विश्वनाथ मैत्रा, जयती मुखर्जी, संगीता भट्टाचार्जी, तांद्रा पाल, लीला चटर्जी, सौजीत चौधरी, पूर्णिमा कुंडू, शैली चटर्जी, पांपा चक्रवर्ती, रीता बनर्जी, राखी रॉय और अपर्णा सान्याल शामिल हैं।
कार्यक्रम में वर्ल्ड मार्शल आर्ट कमेटी के इंडिया चैप्टर से सुबीर बागची, स्वागता मोंडल, पश्चिम बंगाल वन विभाग की डिप्टी रेंजर मासूमा बेगम तथा न्यूज़4ऑल के मुख्य संपादक अमित वर्मा सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
तीन घंटे तक चले संवाद सत्र में प्रतिभागियों ने बंगाल की पारंपरिक पारिवारिक दुर्गा पूजा, जिसे ‘बोनेदी बाड़ी पूजा’ कहा जाता है, के इतिहास और सांस्कृतिक महत्व को समझा। इसमें बताया गया कि किस प्रकार पुराने पारिवारिक घरों में पीढ़ियों से चली आ रही परंपराएं आज भी जीवित हैं।
कार्यक्रम के दौरान आगामी हेरिटेज यात्राओं पर भी चर्चा की गई। इनमें सुंदरबन के पर्यावरण और स्थानीय समुदायों पर केंद्रित इको-हेरिटेज पहल, नवंबर में प्रस्तावित ‘टी गार्डन माइंड रिजुविनेशन’ और दिसंबर में आयोजित होने वाली चार दिवसीय काशी हेरिटेज यात्रा शामिल हैं। इन पहलों के माध्यम से प्रकृति, इतिहास, फोटोग्राफी और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना है।
अभिषेक भट्टाचार्य ने कहा कि विरासत केवल पुरानी इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें हमारी परंपराएं, कहानियां और सामूहिक स्मृतियां भी शामिल हैं। ‘बी ए फोटूरियन’ का उद्देश्य इन अनमोल धरोहरों को तस्वीरों और यात्राओं के माध्यम से संरक्षित करना तथा नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ना है।
‘अपनी यादों को सहेजें — बी ए फोटूरियन’ के संदेश के साथ आयोजित इस कार्यक्रम ने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पर्यटन के माध्यम से उसे नई पहचान देने का प्रयास किया।