टेढ़ागाछ (किशनगंज) विजय कुमार साह
प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत चिल्हनियां स्थित सामुदायिक भवन, सुहिया चौक में मंगलवार को भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI), किशनगंज द्वारा कैंडल मेकिंग (मोमबत्ती निर्माण) प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम एफपीओ चालनईया किसान उत्पादक संगठन के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण युवाओं एवं महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।मंगलवार को आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का निरीक्षण प्रखंड विकास पदाधिकारी अजय कुमार (बीओओ, टेढ़ागाछ) एवं RSETI किशनगंज के निदेशक सुजीत कुमार दास ने संयुक्त रूप से किया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने प्रशिक्षण की गुणवत्ता, प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी एवं व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा कार्यक्रम को उपयोगी और प्रभावी बताया। प्रशिक्षण में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए युवा एवं महिलाएं उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। प्रतिभागियों को मोमबत्ती निर्माण की बारीकियों से अवगत कराया जा रहा है, जिसमें कच्चे माल का चयन, आकर्षक डिजाइनिंग, रंग संयोजन, सुगंधित मोमबत्तियों का निर्माण, पैकेजिंग एवं विपणन की विस्तृत जानकारी शामिल है।
प्रशिक्षकों द्वारा व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को गुणवत्तापूर्ण एवं बाजार योग्य उत्पाद तैयार करना सिखाया जा रहा है, जिससे वे भविष्य में स्वयं का रोजगार स्थापित कर सकें।
इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार के कौशल विकास प्रशिक्षण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार आधारित पहल से न केवल बेरोजगारी में कमी आती है, बल्कि महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर परिवार की आय में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।
प्रखंड विकास पदाधिकारी अजय कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में लघु उद्योगों के माध्यम से बेहतर आय अर्जित करना संभव है। मोमबत्ती निर्माण एक ऐसा व्यवसाय है, जिसे कम पूंजी में शुरू कर बाजार की मांग के अनुसार विस्तार दिया जा सकता है। वहीं RSETI के निदेशक सुजीत कुमार दास ने बताया कि संस्थान का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
कार्यक्रम में प्रशिक्षकों की भूमिका भी सराहनीय रही। प्रीति आनंद, अजमल येजदानी (फैकल्टी), सुभाष कुमार मंडल (फैकल्टी) एवं सुनीता बोदरा (ट्रेनर) ने प्रतिभागियों को सरल, व्यवहारिक एवं प्रभावी तरीके से प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने बताया कि कैसे कम लागत में बेहतर गुणवत्ता की मोमबत्तियां तैयार कर बाजार में प्रतिस्पर्धा की जा सकती है। समापन के दौरान प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण के प्रति संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम से उन्हें रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। स्थानीय स्तर पर ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से न केवल स्वरोजगार को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि ग्रामीण युवाओं एवं महिलाओं के जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।





























