कटिहार – समाजसेवी संस्था भूमिका विहार की ओर से बिहार पुलिस मुख्यालय पटना के अपराध अनुसंधान विभाग एवं कमजोर वर्ग प्रभाग के निर्देशानुसार होटल जेएमडी इंटरनेशनल सभागार में शुक्रवार को सीमांचल के सीमावर्ती इलाकों में डिजिटल माध्यमों से बढ़ते मानव व्यापार विषय पर एक महत्वपूर्ण पूर्णिया प्रमंडल स्तरीय समन्वय बैठक चन्द्रगुप्त इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट पटना के साथ संयुक्त तत्वाधान में आयोजित की गई।

भूमिका विहार सीमांचल क्षेत्र में वर्ष 1996 से सक्रिय एक सामाजिक संस्था है। जो बाल अधिकार संरक्षण,मानव व्यापार की रोकथाम, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण तथा पीड़ितों के पुनर्वास के क्षेत्र में कार्यरत है।
इस बैठक में 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। जिनमें सीमांचल क्षेत्र के कटिहार, अररिया, पूर्णिया एवं किशनगंज जिलों से बिहार पुलिस के विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मी शामिल थे।
विशेष रूप से बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी सीडब्ल्यूपीओ तथा विशेष किशोर पुलिस इकाई एसजेपीयू के प्रतिनिधियों के साथ-साथ बाल संरक्षण से जुड़े अन्य हितधारकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम में डॉ० पीएम नायर पूर्व महानिदेशक, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल एनडीआरएफ तथा पूर्व निदेशक नेशनल रिसर्च ऑन ह्यूमन ट्रैफिकिंग, इंडिया और चेयर प्रोफेसर, टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थानटीआईएसएस, मधुकर अमिताभ उप महानिरीक्षक पुलिस सेक्टर मुख्यालय सशस्त्र सीमा बल, पूर्णिया, संजीव कुमार कमांडेंट, सेक्टर मुख्यालय सशस्त्र सीमा बल, पूर्णिया; प्रो० राणा सिंह – निदेशक चन्द्रगुप्त प्रबंधन संस्थान पटना, कमलेश सिंह देव सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण डीएलएसए, डॉ० जितेन्द्र नारायण सिंह सिविल सर्जन, रवि शंकर तिवारी सहायक निदेशक जिला बाल संरक्षण इकाई, सद्दाम हुसैन पुलिस उपाधीक्षक यातायात, कटिहार सहित कई गणमान्य अतिथि एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।बैठक की अध्यक्षता डॉ० पीएम नायर ने की ।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मानव व्यापार का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और अब डिजिटल माध्यम इसके नए रास्ते बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि बिहार में वर्ष 2022 में मानव व्यापार के 260 मामले दर्ज हुए, जबकि वर्ष 2023 में 132 मामलों में 510 पीड़ितों की पहचान हुई, जिनमें 353 बच्चे थे। इंटरनेट, सोशल मीडिया और फर्जी ऑनलाइन नौकरी के प्रस्तावों के माध्यम से तस्कर युवाओं को अपने जाल में फँसा रहे हैं।
इस चुनौती से निपटने के लिए पुलिस, प्रशासन और समाज के बीच मजबूत समन्वय अत्यंत आवश्यक है।डॉ. राणा सिंह ने कहा कि मानव व्यापार के पीछे गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी और जागरूकता की कमी जैसे सामाजिक कारण प्रमुख हैं। तस्कर इन्हीं कमजोरियों का फायदा उठाकर बच्चों और युवाओं को बेहतर जीवन और रोजगार का लालच देकर अपने जाल में फँसाते हैं।
कमलेश सिंह देव ने कहा कि मानव व्यापार एक गंभीर अपराध है और इसके विरुद्ध भारत में कई सख्त कानून मौजूद हैं, जैसे बाल श्रम निषेध अधिनियम और बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम। इन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से पीड़ितों को न्याय और पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सकता है। मधुकर अमिताभ ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में मानव व्यापार एक गंभीर सुरक्षा चुनौती बनता जा रहा है और डिजिटल माध्यमों के कारण तस्करी के तरीके और जटिल हो गए हैं।
इसलिए सीमा सुरक्षा बल, पुलिस और स्थानीय समुदाय के बीच मजबूत समन्वय अत्यंत आवश्यक है। सद्दाम हुसैन ने कहा कि मानव व्यापार एक संगठित अपराध के रूप में सामने आ रहा है और इसमें परिवहन मार्ग, बस स्टैंड तथा रेलवे स्टेशन जैसी जगहें महत्वपूर्ण कड़ियाँ बन जाती हैं। ऐसे में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, सतर्क निगरानी और समय पर कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है ताकि इस अपराध पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
बैठक के दौरान प्रतिभागियों ने डिजिटल माध्यमों से बढ़ते मानव व्यापार की पहचान, जोखिमग्रस्त बच्चों की सुरक्षा, बचाव-संरक्षण-पुनर्वास तंत्र को मजबूत करने तथा पुलिस एवं नागरिक समाज संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की।कार्यक्रम के अंत में भूमिका विहार की निदेशिका शिल्पी सिंह ने सभी मुख्य अतिथियों, पुलिस विभाग के अधिकारियों, प्रतिभागियों तथा सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि मानव व्यापार जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए सभी विभागों के अधिकारीयों और समाज के सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं जैसा की हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा संबोधन किया जाता है की “सबका साथ सबका विकास” और इस प्रकार की समन्वय बैठकें इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगी क्योंकि जब न्यायिक व्यवस्था सहज होगी तभी तो बच्चों, युवाओं और महिलाओं की न्याय की मंजिल और भी सुदृढ़ बनायीं जा सकती है जहाँ वे न्याय के लिए मन की बात कर सकते हैं।



























