रूप की रानी /उमेश नंदन सिन्हा
कानों में है झुमका तेरे ,भाल पर सुन्दर टीका,,इस सुन्दरता के आगे है ,सबकुछ लगता फीका ,भौहें भी प्रत्यंचा सी हैं ,रूप का बाण चलातीं ,भावुक जन यहाँ जितने ,उनको मुग्ध ,मुग्ध कर जातीँ ।कजरारी आंखों की शोभा ,अनुपम बहुत निराली ,सुन्दर गोरी तुम लगती हो सचमुच में मतवाली ।अधर तुम्हारे सुन्दर ,सुन्दर ,मन्द ,मन्द … Read more