किशनगंज की बेटी निधि चौधरी बांग्लादेश में हुई सम्मानित,बधाइयो का लगा तांता 

“मैं गंगा की उद्गम से पदमा तट पर आई हूँ” किशनगंज /प्रतिनिधि  किशनगंज की बेटी निधि चौधरी ने एक बार फिर से जिले का नाम रोशन किया है । मालूम हो  की निधि को बांग्लादेश में सम्मानित किया गया । प्राप्त जानकारी के मुताबिक बंग्लादेश में शब्द शर साहित्य द्वारा एक कवि सम्मेलन का आयोजन … Read more

वह धीर है गंभीर है -हर्ष कुमार की कविता

किस तरह पुरुष कठोर होकर, अपनो से दूर रहता है, अपनों से दूर होकर भी अपनो के लिए सबकुछ करता है, वो मर्द है और दर्द उसे भी होता है सफर शुरू होता है उसका जैसे ही,कुछ पढ़ने, कमाने बाहर निकल पड़ता है।सभी की आँखों का तारा अब माँ की याद में सुबक सुबक रो … Read more

निधि चौधरी को “सुभद्रा कुमारी चौहान” सम्मान द्वारा किया गया सम्मानित

निधि की कविता “मैं ही दुर्गा भवानी हूँ” की जमकर हुई सराहना उत्तरप्रदेश के प्रयागराज स्थित हिन्दुस्तान साहित्य एकेडमी का गांधी सभागार गूंज उठा निधि चौधरी की कविताओं से। गुफ्तगू मासिक पत्रिका के संस्थापक इम्तियाज़ अहमद गाजी के नेतृत्व में एक शानदार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमे सम्मान समारोह के साथ ही काव्यपाठ का … Read more

सितारों की रात 

   गर इंतज़ार तेरा   बने मेहरबान     ता उम्र बैठूँ में     इंतज़ार में तेरी         तेरी चाल हवा ना बताये         खुशबु छीने फूलों की           उमड़ जाये सारी खुशियां       गर तेरा आना        निश्चित हो जाये          आरजू तेरी … Read more

तुझको चाहा था मैंने तुझे भूलाता कैसे

तुझको चाहा था मैंने तुझे भूलाता कैसे मुझको तेरा न होने का ग़म मिटाता कैसे  मैंने हर रात किया हैं बस याद तुझी को  ख़्वाबों में भी नहीं मिलता दिखाता कैसे  तुमने हर वक्त तो फासले ही रखें हमसे तुमने चाहा ही नहीं रब हमें मिलाता कैसे उसकी आंखों ने पहले ही जुल्म ढाए है … Read more

शायरी : मशहूर शायरो की चुनिंदा शायरी पढ़े

तिरी आरज़ू से भी क्यूँ नहीं ग़म-ए-ज़िंदगी में कोई कमी ये सवाल वो है कि जिस का अब कोई इक जवाब नहीं रहा :सहर अंसारी ——————– कितने मुफ़लिस हो गए कितने तवंगर हो गए ख़ाक में जब मिल गए दोनों बराबर हो गए :~शेख़ इब्राहीम ज़ौक़  _________________________________ ग़म-ए-ज़माना ने मजबूर कर दिया वर्ना ये आरज़ू … Read more

राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष : प्रसिद्ध कवयित्री निधि चौधरी की ‘रावण का वध स्वयं करूंगी’ सहित तीन बेहतरीन रचनाएं पढ़े

(1) रावण का वध स्वयं करूँगी चलना सड़कों पर भी अब मुहाल हुआ,कुचले पुष्प सा तेरा हाल हुआ,खुद की खुशियों का खुद भी हिस्सा बन,तू शिलालेख सा स्वर्णिम किस्सा बन,तू चंडी बन तू दुर्गा बन,रावण का वध स्वयं करूँगी,कहने वाली सीता बन। लाख द्रोपदी लुटती जाए,चिथड़े काया की उड़ती जाए,अब ना कोई वृंदावन या वंशीवाला,यहाँ … Read more

कविता :आज के अविरल कवि

मधुबाला मौर्या सोच रही हु किसपे लिखूकवि पर या कविता परव्याकुल मन अधीर हो बैठाखोजने चली जब दिनकर को , एक समय था आज की नहीं बीते हुए कल की,एक महादेवी देवी वर्मा थी दूजेहरिवंशराय बच्चन जी , समय समय के अविरल कवितब के कविता मे ,रस –संगीत -लय और ताल थी,जीवन जीने की सीख … Read more

कविता :जब कोई आदमी करता है किसी से सच्चा प्यार

जब कोई आदमीकरता है किसी सेसच्चा प्यारतो सब कुछ बताना चाहता है ! आसमान का रंगइस समय कैसा हैकैसी हो रही है बारिशअचानक उसके शहर मेंकितनी उल्लसित हैं तरंगेंसमुद्र मेंकितना-कितना गर्जनकितनी गहरी है रातकितनी उदासी ! वह अपनी हर ख़ुशीबताना चाहता हैजब उड़ी आसमान पर पतंगें उसकीतो वह इस ख़ुशी को फ़ौरनएक संदेश की तरह … Read more

दर्द उसे भी होता है !

प्रस्तुति /हर्ष सिंह सफर शुरू होता है उसका जैसे ही,कुछ पढ़ने कुछ कमाने बाहर निकल पड़ता है।          सभी की आँखों का तारा अबउनकी याद में सुबक सुबक रो पड़ता है।।            जब भी माँ का फोन हो,झूठी मुस्कान से बस ठीक हूँ कह देता है।      … Read more