शायरी:न पूछ ज़ालिम के कैसी गुज़री है रातें,पढ़े चुनिंदा और बेहतरीन शायरी
तेरे दीदार की हसरत लिए फिरते हैं,हम तन्हा दिल में मोहब्बत लिए फिरते हैं।न पूछ ज़ालिम के कैसी गुज़री है रातें,तेरी यादों की चादर लिए फिरते हैं। तेरे नाम से महक उठे हैं गुलशन सारे,तेरे साए में ही गुज़रे हैं मौसम हमारे।तू ना मिला तो क्या, शिकवा नहीं हमको,तेरी यादें ही हैं अब साज़-ए-दिल हमारे। … Read more