माईर बबा घोर ओसबे (सुरजापुरी लघुकथा)
ठंडा बढ़वार साथ एकटा सुरजापुरी घोरेर चौखटोत दस्तक दिछे भक्का, पीठो आर कुछू प्रवासी भई ला! गांवोंर जेला प्रवासी ठंड प्रदेशोत काम करछे वार तने ठंडार इला तीन-चार महीना काम करना बहुत मुश्किल होए जाछे। ओयलात ना चाहते हुए भी उसाक अपना घोर, अपना गांव ओसुवा हछे। एक तो काम बंद ऊपर से तीन-चार महीना … Read more