डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय में “नशा मुक्त युवा, विकसित भारत संकल्प अभियान” का हुआ आयोजन

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रविवार को डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय को “नशा मुक्त युवा, विकसित भारत संकल्प अभियान” के अंतर्गत एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशे की बुराइयों से अवगत कराते हुए स्वस्थ, अनुशासित एवं जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. के. सत्यनारायणन ने की। इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. मुकुल, डॉ. लव, डॉ. मनीष सहित महाविद्यालय के अन्य वैज्ञानिक, शिक्षकगण, छात्र-छात्राएँ एवं गैर-शिक्षण कर्मचारी उपस्थित रहे।कार्यक्रम के दौरान भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का महाविद्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में सजीव प्रसारण (लाइव टेलीकास्ट) सामूहिक रूप से देखा एवं सुना गया।

प्रधानमंत्री के संदेश से प्रेरणा लेते हुए उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने नशा मुक्त भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प व्यक्त किया।अपने संबोधन में प्राचार्य डॉ. के. सत्यनारायणन ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी युवा आबादी है। यदि युवा वर्ग नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर अपनी ऊर्जा को शिक्षा, अनुसंधान, कृषि नवाचार, खेल तथा राष्ट्र निर्माण में लगाए, तो विकसित भारत का लक्ष्य शीघ्र प्राप्त किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि उसके परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति में भी बाधा उत्पन्न करता है।एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. मुकुल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि नशा व्यक्ति की निर्णय क्षमता, मानसिक संतुलन एवं कार्यक्षमता को कमजोर करता है। इससे अनेक सामाजिक समस्याएँ, अपराध, सड़क दुर्घटनाएँ तथा पारिवारिक विघटन जैसी गंभीर परिस्थितियाँ उत्पन्न होती हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से नशे के विरुद्ध जन-जागरूकता अभियान चलाने तथा समाज में सकारात्मक संदेश फैलाने का आह्वान किया।डॉ. लव एवं डॉ. मनीष ने नशे के विभिन्न प्रकारों, उनके शारीरिक एवं मानसिक दुष्प्रभावों तथा उनसे बचाव के उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नियमित योग एवं व्यायाम, खेलकूद, संतुलित आहार, सकारात्मक मित्र मंडली, समय का सदुपयोग, पारिवारिक सहयोग तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं परामर्शदाताओं की सहायता लेकर नशे की लत से छुटकारा पाया जा सकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों से किसी भी प्रकार के नशे को “ना” कहने और अपने मित्रों एवं परिवार के सदस्यों को भी इसके प्रति जागरूक करने का आग्रह किया।कार्यक्रम में उपस्थित वैज्ञानिकों ने भी युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वयं नशामुक्त जीवन अपनाएँ तथा अपने गांव, परिवार और समाज में नशा उन्मूलन के लिए जन-जागरूकता फैलाएँ। वक्ताओं ने कहा कि नशामुक्त युवा ही विकसित भारत की सबसे मजबूत नींव हैं।

कार्यक्रम के अंत में सभी छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, वैज्ञानिकों एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से “नशा मुक्त युवा, विकसित भारत” का संकल्प लिया। सभी ने प्रतिज्ञा की कि वे स्वयं किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहेंगे, दूसरों को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करेंगे तथा एक स्वस्थ, जागरूक, सशक्त एवं विकसित भारत के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान देंगे।कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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