गोल्डन फाईबर जूट की चमक वापस लाने की पहल, निदेशक ने संभावनाओं का किया आंकलन

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कटिहार – जिले में जूट गोल्डन फाइबर की खोई चमक को वापस लाने के प्रयास तेज हो गए हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत केन्द्रीय पटसन एवं समवर्गीय रेशा अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर कोलकाता के निदेशक डॉ. गौरांग कर ने जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण कर जूट खेती की संभावनाओं का आकलन किया।

अपने दौरे के दौरान उन्होंने मनिहारी प्रखंड के मुजवर एवं गोगाबिल झील के आसपास स्थित उपजाऊ भूमि का निरीक्षण किया और स्थानीय किसानों से जूट की खेती में आने वाली व्यवहारिक कठिनाइयों की जानकारी ली। किसानों ने उत्पादन, लागत, श्रम और बाजार से जुड़ी समस्याओं को उनके समक्ष रखा।डॉ. कर ने कहा कि एक समय जूट प्रमुख नकदी फसल हुआ करती थी, लेकिन प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग के कारण इसकी मांग में कमी आई, जिससे किसान धीरे-धीरे इससे विमुख होते गए। वर्तमान में मक्का, केला और मखाना जैसी फसलों ने इसकी जगह ले ली है।

उन्होंने बताया कि कटिहार जिला जूट उत्पादन के क्षेत्र में पहले अग्रणी रहा है। यहां की उपजाऊ मिट्टी, अनुकूल जलवायु तथा स्वच्छ जल की उपलब्धता उच्च गुणवत्ता वाली जूट उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त है। इन संभावनाओं को देखते हुए विभाग अन्य संबंधित एजेंसियों के समन्वय से जूट उत्पादन को पुनर्जीवित करने के लिए प्रयासरत है।

उन्होंने विश्वास जताया कि वैज्ञानिक तरीके और सरकारी सहयोग से गोल्डन फाइबर की चमक एक बार फिर लौट सकती है। इस मौके पर वरीय वैज्ञानिक एस के झा, आत्मा के परियोजना निदेशक एस के झा सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे ।

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